अमृतसरः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को पंजाब राज्य विद्युत निगम में भर्ती हुए 2,105 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही पिछले साढ़े तीन वर्षों में आप सरकार द्वारा युवाओं को दी गई सरकारी नौकरियों की कुल संख्या 58,962 हो गई है। अमृतसर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में आयोजित एक समारोह में उन्होंने कहा कि बेरोजगारी कई सामाजिक समस्याओं की जड़ है, इसलिए राज्य सरकार इसे खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
Related Stories
भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर सबसे अधिक जोर दे रही है। मान ने कहा कि आप सरकार ने युवाओं को केवल योग्यता के आधार पर नौकरियां दी हैं और आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान नौकरियां देने में भ्रष्टाचार और पक्षपात का बोलबाला था।
भगवंत मान ने युवाओं से कही ये बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये नवनियुक्त युवा अब सरकार का अभिन्न अंग हैं और उन्हें मिशनरी उत्साह के साथ लोगों की सेवा करनी चाहिए। जिस तरह एक रनवे हवाई जहाज़ को उड़ान भरने में मदद करता है, उसी तरह राज्य सरकार युवाओं को उनके सपने पूरे करने में मदद करेगी। उन्होंने सभी युवाओं से नशे के खिलाफ युद्ध जैसे अभियानों में शामिल होने की अपील की ताकि राज्य सरकार इस बुराई को जड़ से उखाड़ फेंक सके।
सीएम मान ने विपक्ष पर साधा निशाना
पंजाब को "कर्ज में डुबोने" के लिए पिछली सरकारों को दोषी ठहराते हुए उन्होंने कहा कि आप सरकार को 2.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पारंपरिक राजनीतिक दल उनसे ईर्ष्या करते हैं क्योंकि वह एक सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने कहा कि ये नेता इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि एक आम आदमी राज्य को इतनी कुशलता से चला रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज़ादी के बाद से ही उन्होंने लोगों को गुमराह किया है और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा है, यही वजह है कि लोगों ने उन्हें नकार दिया है।
मान ने कहा कि पहाड़ी इलाकों के बोर्डिंग स्कूलों में पढ़े ये नेता पंजाब की ज़मीनी हक़ीक़त से अनजान हैं। पंजाब के मामलों में दखल देने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र जानबूझकर राज्य को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, "पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की सीनेट और सिंडिकेट को भंग करना राज्य की गौरवशाली विरासत पर सीधा हमला है। पंजाब विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि पंजाबी पहचान का एक भावनात्मक हिस्सा है, जहां पीढ़ियों ने शिक्षा प्राप्त की है।"
इनपुट- पीटीआई