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Lok Sabha Elections 2024: 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान हुई थी जिस सांसद की मौत, कांग्रेस ने उनके बेटे को पार्टी से निकाला

 Reported By: Puneet Pareenja Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Apr 24, 2024 09:18 pm IST,  Updated : Apr 24, 2024 09:18 pm IST

कांग्रेस ने फिल्लोर से अपने विधायक विक्रमजीत सिंह चौधरी को पार्टी के सभी पदों से मुक्त करते हुए निष्कासित कर दिया है। विक्रमजीत सिंह का परिवार जालंधर लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को टिकट दिए जाने से नाराज था।

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कांग्रेस से निष्कासित नेता विक्रमजीत सिंह चौधरी। Image Source : FACEBOOK.COM/VIKRAMJITSINGHCHAUDHARY

चंडीगढ़: पंजाब के फिल्लोर से विधायक विक्रमजीत सिंह चौधरी को कांग्रेस ने पार्टी के सभी पदों से मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने विधायक को पार्टी से भी निष्कासित कर दिया है। बता दें कि विक्रमजीत सिंह कांग्रेस के दिवंगत सांसद संतोख सिंह चौधरी के बेटे हैं। संतोख सिंह चौधरी की राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान 14 जनवरी 2023 को मौत हो गई थी। वह 2014 से ही जालंधर से सांसद थे और सूबे में पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते थे।

कांग्रेस ने विक्रमजीत को क्यों किया निष्कासित?

दरअसल, विक्रमजीत सिंह की मां कर्मजीत कौर चौधरी ने हाल ही में बीजेपी का दामन थाम लिया था। चौधरी परिवार जालंधर से सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने के खिलाफ था और इसी वजह से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहा था। बता दें कि संतोख सिंह चौधरी की मौत के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने कर्मजीत कौर को टिकट दिया था, लेकिन वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सुशील रिंकू से चुनाव हार गई थीं। शायद यही वजह है कि पार्टी ने इस बार उनको टिकट न देकर चन्नी पर भरोसा दिखाया।

पंजाब में एक जून को डाले जाने वाले हैं वोट

बता दें कि पंजाब में लोकसभा चुनावों के 7वें और आखिरी चरण में 1 जून को मतदान होगा और 4 जून को वोटों की गिनती होगी। इस बार के लोकसभा चुनावों में काफी कुछ बदल चुका है क्योंकि अब आम आदमी पार्टी सत्ता में है और कांग्रेस की विधानसभा चुनावों में बुरी हार हुई थी। वहीं, अकाली दल और बीजेपी इस बार गठबंधन में नहीं हैं और दोनों का प्रदर्शन विधानसभा चुनावों में कुछ खास नहीं रहा था। हालांकि सभी पार्टियों को उम्मीद है कि वे इन चुनावों में 2019 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेंगी और लोकसभा में अपने ज्यादा से ज्यादा सांसद भेजेंगी।

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