जोधपुर: राजस्थान के पीथावास गांव की एक लड़की जिसकी महज छह साल की उम्र में शादी कर दी गई थी, आखिरकार वह एक एनजीओ सारथी ट्रस्ट की सहायता से 12 साल की अपनी शादी को रद्द कराने में सफल हुई। अब 18 साल की हो चुकीं एक मजदूर की बेटी पिंटूदेवी की शादी सारण नगर के एक युवक से हुई थी। उनकी शादी को मंगलवार को जोधपुर के एक पारिवारिक न्यायालय द्वारा रद्द किया गया।
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बचपन में ब्याही गई लड़की के ससुराल वाले कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे। पिंटूदेवी ने जब तलाक मांगा तो उन लोगों ने उनके परिवार को समाज से बहिष्कृत करा देने की धमकी दी।
जोधपुर के गैर-सराकरी संगठन सारथी ट्रस्ट की संस्थापक व मैनैजिंग ट्रस्टी कृति भारती की मदद से पिंटूदेवी ने जून में शादी रद्द कराने के लिए याचिका दायर की।
न्यायाधीश पी.के.जैन ने समाज को बाल विवाह की बुराइयों के बारे में संदेश देते हुए शादी को रद्द करने के आदेश दिए।
पिंटूदेवी ने आईएएनएस को बताया, "कृति दीदी की मदद से मैं बाल विवाह के चंगुल से आजाद हुई और अब मैं अपने सपने को साकार करने के लिए पढ़ाई करूंगी।"
भारती ने कहा कि पिंटूदेवी की शादी रद्द होने के बाद उनके पुनर्वास के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं।