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Bahula Chaturthi katha: बहुला चतुर्थी के दिन पूजा के दौरान जरूर करें ये कथा, भगवान करेंगे आपके पुत्रों की रक्षा

 Published : Aug 11, 2025 12:26 pm IST,  Updated : Aug 12, 2025 09:19 pm IST

बहुला चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश और चंद्रमा की पूजा का विधान है। ऐसे में इस दिन एक कथा प्रचलित है, जिसे अगर आप करते हैं तो भगवान आपके पुत्रों की रक्षा स्वयं करेंगे।

बहुला चतुर्थी कथा- India TV Hindi
गाय के साथ भगवान श्री कृष्ण Image Source : FREEPIK

बहुला चतुर्थी या कहें संकष्टी चतुर्थी माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि बहुला चौथ के नाम से भी जानी जाती है। इस साल यह पर्व 12 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के निमित्त व्रत किया जाता है। साल में मनाई जाने वाली प्रमुख चार चतुर्थियों में से एक है, जो हिंदू धर्म के हिसाब से बेहद खास होती है। इस दिन महिलाएं अपनी पुत्रों की रक्षा की कामना करती है। इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा का विधान है। पूजा के दौरान एक कथा प्रचलित है जिसे करने या सुनने पर भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त के पुत्रों की रक्षा करते हैं तो आइए जानते हैं कि बहुला चतुर्थी की कथा...

बहुला चतुर्थी की कथा

एक बार कामधेनु (गाय) के मन में भगवान श्रीकृष्ण की सेवा का ख्याल आया तो वे अपने अंश से बहुला नाम की गाय बनकर नंद की गौशाला में आ गईं। वो जानती थी भगवान कृष्ण को गायों से बड़ा स्नेह है। ऐसे में वह भगवान की सेवा में लग गई। भक्ति भाव को समझ कर कृष्ण जी ने सोचा की बहुला की क्यों न परीक्षा ली जाए तो जब बहुला वन में घास चर रही थी तब भगवान शिंग आनी शेर के रूप में आए। मौत को सामने देख बहुला भयभीत हो गई, लेकिन हिम्मत जुटाकर शेर से बोलीं, 'हे वनराजा मेरा बछड़ा भूखा है, मुझे बछड़े को दूध पिलाकर वापस आने की इजाजत दें तो मैं आपका आहार बनने वापस आ जाऊंगी'

शेर ने कहा कि सामने आए आहार को कैसे जाने दूं, तुम वापस नहीं आई तो मैं तो भूखा रह जाऊंगा। बहुता ने सत्य और धर्म की शपथ लेकर कहा कि मैं अवश्य वापस आ जाऊंगी। चूंकि भगवान तो बहुला की परीक्षा ले रहे तो उन्होंने बहुला का जानें। बहुला घर आई और अपने बछड़े को दूध पिलाया और उस पर अपना खूब स्नेह लुटाया। फिर वह वन में वापस आ गई।

बहुला की सत्यनिष्ठा देखकर सिंह रूपी कृष्ण बेहद प्रसन्न हुए और अपने वास्तविक रूप में आकर कहा, 'हे बहुला तुम परीक्षा में सफल हुई। अब से भाद्रपद चतुर्थी के दिन गौ-माता के रूप में तुम्हारी पूजा होगी और तुम्हारी पूजा करने वाले भक्त को धन और संतान का सुख प्राप्त होगा।'

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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