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December Purnima 2025 Date: दिसंबर में पूर्णिमा कब है 4 या 5? जान लें मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत की सही डेट और मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Dec 01, 2025 08:05 am IST,  Updated : Dec 04, 2025 07:11 am IST

December Purnima 2025 Date: दिसंबर में मार्गशीर्ष पूर्णिमा पड़ेगी। ये दिन स्नान, दान और तप इत्यादि कार्यों के लिए खास माना गया है। इस दिन कई श्रद्धालु उपवास भी करते हैं। चलिए आपको बताते हैं दिसंबर की पूर्णिमा की सही तारीख।

purnima 2025 date- India TV Hindi
मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है 2025 Image Source : CANVA

December Purnima 2025 Date: साल में आने वाली 12 पूर्णिमासी में से मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima) का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। इतना ही नहीं इस दिन किए गए दान का पुण्य अन्य पूर्णिमा की तुलना में 32 गुना अधिक मिलता है इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस शुभ अवसर पर भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है। इस पूर्णिमा को "मोक्षदायिनी पूर्णिमा" भी कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। चलिए आपको बताते हैं इस साल ये पूर्णिमा कब है।

दिसंबर मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 डेट (December Margashirsha Purnima Date 2025)

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 4 दिसंबर 2025, गुरुवार
चंद्रोदय समय 04:35 पी एम
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ दिसम्बर 04, 2025 को 08:37 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त दिसम्बर 05, 2025 को 04:43 ए एम बजे

पूर्णिमा व्रत विधि (Purnima Vrat Vidhi)

  1. पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल किसी पवित्र नदी में स्नान और तर्पण करें। अगर नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद व्रत का संकल्प करें - "मैं अपने परिवार की कुशलता और सुख-समृद्धि की कमाना से पूर्णिमा का व्रत करूंगा या करूंगी। व्रत के पूर्ण होने हेतु भगवान गणपति की पूजा और कलश पूजन भी करूंगा या करूंगी।"
  2. संकल्प ग्रहण करने के बाद सबसे पहले कलश स्थापना और भगवान गणेश का पूजन करें।
  3. इसके बाद भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चन्द्रदेव का पूजन करें।
  4. पूरे दिन उपवास का पालन करें और भगवान का ध्यान, जप, भजन आदि करें।
  5. शाम के समय में चन्द्रदेव को अर्घ्य अर्पित कर उनका पूजन करें।
  6. पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें।
  7. भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें।
  8. जरूरतमंदों को दान करें।
  9. अगले दिन व्रत का पारण करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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