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Ekadashi April 2026: अप्रैल की पहली एकादशी किस दिन है, क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त?

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Apr 10, 2026 01:22 pm IST,  Updated : Apr 10, 2026 01:23 pm IST

Ekadashi April 2026: अप्रैल की पहली एकादशी वरुथिनी एकादशी होगी, जो 12 अप्रैल 2026 की देर रात 1 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 13 अप्रैल की देर रात 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। जानिए पंचांग अनुसार एकादशी व्रत किस दिन रखा जाएगा।

april ekadashi- India TV Hindi
अप्रैल की एकादशी Image Source : INDIA TV

Ekadashi April 2026: वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से जीवन के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही श्री हरि विष्णु भगवान अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। इस एकादशी पर जरूरतमंदों को दान करना बेहद पुण्य का काम माना गया है। चलिए जानते हैं अप्रैल की ये एकादशी किस तारीख को मनाई जाएगी।

अप्रैल एकादशी 2026

अप्रैल की पहली एकादशी 13 तारीख को मनाई जाएगी। इस एकादशी का पारण समय 14 अप्रैल की सुबह 06:54 से 08:31 बजे तक रहेगा।

अप्रैल एकादशी मुहूर्त 2026

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:28 AM से 05:13 AM 
  • प्रातः सन्ध्या - 04:51 AM से 05:58 AM
  • अभिजित मुहूर्त -11:56 AM से 12:47 PM
  • विजय मुहूर्त - 02:30 PM से 03:21 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:44 PM से 07:07 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:46 PM से 07:53 PM
  • निशिता मुहूर्त - 11:59 PM से 12:44 AM, अप्रैल 14

चौघड़िया मुहूर्त 

  • अमृत - सर्वोत्तम - 05:58 AM से 07:34 AM
  • शुभ - उत्तम - 09:10 AM से 10:46 AM
  • लाभ - उन्नति - 03:34 PM से 05:10 PM
  • अमृत - सर्वोत्तम - 05:10 PM से 06:46 PM

वरूथिनी एकादशी का महत्व 

इस एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु इस एकादशी का व्रत रखता है उसे भूत-पिशाच जैसी योनियों में जन्म लेने से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य के कार्य करने से जीवन में सुख-समद्धि आती है। शास्त्रों में इस एकादशी व्रत का महत्व 10 हजार साल की तपस्या के बराबर बताया गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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