Falgun Amavasya 2025: पितरों को प्रसन्न करने के लिए फाल्गुन अमावस्या के दिन करें ये काम, पितृ दोष से भी मिलेगी मुक्ति
Falgun Amavasya 2025: पितरों को प्रसन्न करने के लिए फाल्गुन अमावस्या के दिन करें ये काम, पितृ दोष से भी मिलेगी मुक्ति
Written By: Vineeta Mandal
Published : Feb 24, 2025 06:48 pm IST,
Updated : Feb 24, 2025 06:48 pm IST
Falgun Amavasya 2025: कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर पितरों की कृपा रहती है उसे जीवन में कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। ऐसे में यहां जान लीजिए कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए अमावस्या के दिन क्या काम करना चाहिए।
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फाल्गुन अमावस्या 2025
Falgun Amavasya 2025: फाल्गुन अमावस्या 27 फरवरी को मनाई जाएगी। अमावस्या के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। कहते हैं कि स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिडंदान भी किया जाता है। ऐसा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितर भी पृथ्वी लोक पर आते हैं। तो इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए ये काम जरूर करें।
अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए क्या करें?
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृ चालीसा, पितृ स्तोत्र और पितृ कवच का पाठ करें। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करें। इसके बाद गरीब और जरूरतमंदों को दान भी करें।
फाल्गनु अमावस्या के दिन गाय, कौवा, चींटियों और कुत्ता को भोजन कराएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
अमावस्या के दिन घर के बाहर सूर्यास्त के बाद यानी शाम के समय दक्षिण दिशा में दीया जलाएं।
फाल्गुन अमावस्या 2025 स्नान-दान मुहूर्त
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ- 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 8 मिनट पर
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि समाप्त- 28 फरवरी को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर
स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 09 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
स्नान-दान के लिए अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
पितृ दोष के लक्षण क्या होते हैं?
पितृ दोष के कारण परिवार की तरक्की में बाधा आती है।
पितृ दोष की वजह से घर में हमेशा क्लेश की स्थिति बनी रहती है।
विवाह और संतान से जुड़ी समस्याएं आने लगती हैं।
परिवार के सदस्यों पर हमेशा कलंक लगने का डर बना रहता है और समाज में उन्हें सम्मान नहीं मिलता।
बच्चे बुरे आचरण वाले हो जाते हैं।
व्यापार में सफलता नहीं मिलती और परिवार में हमेशा क्रोध और द्वेष बना रहता है।
पहले से बने काम भी विफल हो जाते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)