Narak Chaturdashi 2025 Puja Vidhi & Muhurat: नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी (Roop Chaturdashi 2025) या रूप चौदस (Roop Chaudas 2025) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन अभ्यंग स्नान करने वाले लोग नरक जाने से बच जाते हैं। अभ्यंग स्नान के समय उबटन के लिये तिल के तेल का उपयोग किया जाता है। नरक चतुर्दशी की शाम में दीये जलाए जाते हैं और यमराज से अकाल मृत्यु की मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। चलिए जानते हैं इस साल नरक चतुर्दशी कब है और इसकी पूजा विधि, मुहूर्त क्या रहेगा।
नरक चतुर्दशी कब है 2025 (Narak Chaturdashi 2025 Date And Time)
- नरक चतुर्दशी - 20 अक्टूबर 2025, सोमवार
- अभ्यंग स्नान मुहूर्त - 05:13 AM से 06:25 AM
- नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय - 05:13 AM
- चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 19, 2025 को 01:51 PM बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त - अक्टूबर 20, 2025 को 03:44 PM बजे
नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान मुहूर्त 2025 (Narak Chaturdashi 2025 Abhyangsnan Time)
नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान मुहूर्त 20 अक्टूबर 2025 की सुबह 05:13 AM से 06:25 AM तक रहेगा।
नरक चतुर्दशी पूजा विधि (Narak Chatudashi 2025 Puja Vidhi)
- नरक चतुर्दशी के दिन सुबह सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान करने का विशेष महत्व मान जाता है।
- कहते हैं इस दौरान तिल के तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए और उसके बाद चिरचिरा (औधषीय पौधा) को सिर के ऊपर से चारों ओर 3 बार घुमाना चाहिए।
- इस दिन अहोई अष्टमी के दिन लोटे में रखे गए पानी को अपने नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करने की विशेष परंपरा निभाई जाती है। कहते हैं ऐसा करने से नरक में जाने के भय से मुक्ति मिल जाती है।
- इस दिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें।
- फिर शाम में यमराज के निमित्त तेल का दीया घर के मुख्य द्वार से बाहर की ओर जलाएं।
- इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी करनी चाहिए। कहते हैं ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
नरक चतुर्दशी पर किसकी पूजा करनी चाहिए (Narak Chaturdashi Par Kiski Puja Kare)
नरक चतुर्दशी के दिन यमराज और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। कहते हैं इससे व्यक्ति के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है। साथ ही इस दिन यमराज के समक्ष दीपदान भी करना चाहिए।
नरक चतुर्दशी कैसे मनाएं? (Narak Chaturdashi Par Kya Kare)
नरक चतुर्दशी के दिन शाम में देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ तेल का दिया जलाना चाहिए। साथ ही इस दिन रूप और सौन्दर्य के लिए भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। वहीं सुबह अभ्यंग स्नान करना चाहिए।
नरक चतुर्दशी कथा (Narak Chatudashi Katha)
नरकासुर नामक एक राक्षस ने अपनी शक्तियों से सभी को परेशान कर दिया था। उसका अत्याचार इतना बढ़ने लगा कि उसने देवता और संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंधक बना लिया। जिससे परेशान होकर देवता और साधु-संत भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए। तब भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने का सभी देवी-देवताओं को आश्वासन दिया। नरकासुर को एक स्त्री के हाथों से ही मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से सभी स्त्रियों को आजाद कराया। नरकासुर के वध के बाद लोगों ने कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दीये जलाएं। कहते हैं तभी से इस दिन नरक चतुर्दशी और दिवाली का पर्व मनाया जाने लगा।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
Dhanteras 2025 Puja Time: धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, यहां मिलेगी शहर अनुसार जानकारी