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षटतिला एकादशी पर इन 6 तरीकों से किया जाता है तिल का विशेष उपयोग, जिनसे दूर होता है दुर्भाग्य और मिलती है विष्णु कृपा

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jan 13, 2026 06:39 pm IST,  Updated : Jan 13, 2026 07:27 pm IST

Shattila Ekadashi Til ke 6 Upay: षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस दिन तिल का 6 प्रकार से उपयोग करना श्रेष्ठ माना गया है। तिल स्नान से लेकर तिल दान और तर्पण तक, ये उपाय आध्यात्मिक शुद्धि, पितृ शांति और दुर्भाग्य नाश का माध्यम बनते हैं।

Shattila Ekadashi Til Ke 6 Upay- India TV Hindi
षटतिला एकादशी पर तिल के 6 विशेष उपयोग Image Source : INDIA TV

Shattila Ekadashi Til ke 6 Upay: माघ मास की षटतिला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है। इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी पर तिल से जुड़े छह खास उपाय करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए यहां जानते हैं कि माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। ऐसे में इस दिन विशेष तौर पर 6 तरीकों से तिल का इस्तेमाल क्या जाता है। आइए यहां जानते हैं कि षटतिला एकादशी में किन 6 तरीकों से तिल का उपयोग किया जाता है।  

षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, पूरे साल में 24 एकादशी आती हैं, जिनका अलग-अलग महत्व है। षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत, पूजा और तिल का उपयोग करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख, शांति और धन-वैभव बढ़ता है।

इस दिन निम्न 6 प्रकार से तिल का उपयोग करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। 

  • तिल स्नान
  • तिल की उबटन
  • तिलोदक
  • तिल का हवन
  • तिल का भोजन
  • तिल का दान

1. तिल स्नान से होती है आत्मिक शुद्धि

षटतिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जल में तिल मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह स्नान न केवल शरीर की स्वच्छता करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर मानसिक और आत्मिक शुद्धि भी प्रदान करता है।

2. तिल का उबटन लगाना क्यों है शुभ

स्नान से पहले तिल से बना उबटन शरीर पर लगाना लाभकारी माना गया है। तिल के औषधीय गुण त्वचा और शरीर के दोषों को दूर करते हैं। धार्मिक रूप से यह स्वयं को भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुद्ध करने की पवित्र प्रक्रिया मानी जाती है।

3. तिलोदक और पितृ तर्पण का महत्व

षटतिला एकादशी पितृ शांति के लिए भी विशेष मानी जाती है। जल में तिल मिलाकर पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

4. तिल का हवन दूर करता है नकारात्मकता

इस दिन पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए तिल की आहुति दें। तिल हवन से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

5. तिल से बने भोजन का धार्मिक लाभ

षटतिला एकादशी पर तिल से बने सात्विक व्यंजन पहले भगवान विष्णु को अर्पित करें और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। ऐसा करने से स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

6. तिल का दान और गौ सेवा का पुण्य

शास्त्रों के अनुसार, बिना दान के एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है। इस दिन तिल, तिल के लड्डू या तांबे के पात्र में तिल-गुड़ का दान करना श्रेष्ठ होता है। साथ ही लाल गाय को गुड़ और घास खिलाकर पानी पिलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

षटतिला एकादशी पर तिल के इन छह पवित्र उपयोगों से दुर्भाग्य, दरिद्रता और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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