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Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त, जानें भगवान विष्णु को समर्पित ये व्रत क्यों है बेहद पुण्यदायी

 Written By: Arti Azad
 Published : Jan 13, 2026 04:38 pm IST,  Updated : Jan 13, 2026 04:38 pm IST

Shattila Ekadashi 2026: साल 2026 में षटतिला एकादशी मकर संक्रांति के शुभ संयोग के साथ मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। सही पूजा विधि, तिल से बने भोग और शुभ मुहूर्त में उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

Shattila Ekadashi 2026 shubh muhurt- India TV Hindi
षटतिला एकादशी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त Image Source : INDIA TV

Shattila Ekadashi 2026 Puja Vidhi Aur Muhurat: षटतिला एकादशी व्रत विशेष पुण्यदायी माना जाता है। माघ मास में आने वाली षटतिला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से तिल से जुड़ी पूजा और दान के लिए प्रसिद्ध है। पंचांग के अनुसार, 2026 में षटतिला एकादशी 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है और पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इस दिन बनने वाले शुभ संयोगों के बारे में, साथ ही जानें षटतिला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है। 

षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और शुभ संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 13 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट पर होगा और समापन 14 जनवरी को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन मकर संक्रांति के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। 

षटतिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 28 मिनट से 6 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में आप नहा-धोकर व्रत और पूजा का संकल्प ले सकते हैं।

षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत रखने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस दिन किए गए जप, तप और दान का फल दोगुना मिलता है। मान्यता है कि तिल से की गई पूजा व्यक्ति के पापों का नाश करती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

षटतिला एकादशी पूजा विधि

  1. षटतिला एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। 
  2. पूजा स्थल पर पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। 
  3. देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। 
  4. इसके बाद एकादशी व्रत कथा, विष्णु सहस्रनाम और 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करें। 
  5. पूजा में तिल से बने लड्डू या अन्य व्यंजन भगवान को भोग के रूप में अर्पित करें। 
  6. षटतिला एकादशी के दिन गंगाजल से अभिषेक और तुलसी पूजन करना विशेष फलदायी माना गया है।

षटतिला एकादशी व्रत पारण विधि

षटतिला एकादशी व्रत का पारण करने का समय 15 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट तक है। लगभग सवा 2 घंटे की इस अवधि में किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके लिए द्वादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल की सफाई के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। सात्विक भोजन का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी के पत्ते अवश्य शामिल हों। इसके बाद प्रसाद का वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें। 

षटतिला एकादशी के लाभ

षटतिला एकादशी का व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन का भी प्रतीक है। तिल आधारित सात्विक आहार, सही मुहूर्त में पूजा और दान व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। षटतिला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करना जीवन में शुभता और पुण्य बढ़ाने का उत्तम माध्यम माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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