Shivling Puja Niyam: सप्ताह का सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन व्रत करने का भी विधान है। धार्मिक मान्यता है कि सोमवार का व्रत करने से भोलेनाथ व्यक्ति की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। वहीं जो लोग व्रत नहीं करते वो सोमवार के दिन महादेव की पूजा कर के भी शुभ फलों की प्राप्ति कर सकते हैं। सोमवार के दिन मंदिर जाकर शिवजी के दर्शन करना भी अत्यंत ही फलदायी माना गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का क्या सही नियम है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से क्या होता है?
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भोले शंकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने सबसे पहले अपने तप के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया था। बेलपत्र अर्पित कर के ही मां गौरी ने भगवान शिव की उपासना की थी। माता पार्वती ने महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या किया था। यही वजह है कि बेलपत्र के बिना भोलेनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है?
- शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ता कहीं से भी कटा-फटा न हो।
- इसके अलावा धारियों वाला बेलपत्र कभी नहीं चढ़ाना चाहिए।
- बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग पर रखना चाहिए।
- बेलपत्र सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन तोड़ना वर्जित होता है।
- पूजा के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़कर रख लें।
- शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। लेकिन इससे अधिक बेल पत्र भी चढ़ा सकते हैं।
- एक ही बेलपत्र को पानी से धोकर बार-बार चढ़ा सकते हैं।
- गलती से भी कभी शिवलिंग पर खंडित बेल पत्र न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर पहले क्या चढ़ाना चाहिए?
शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाना चाहिए इसके बाद बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद शिवलिंग पर दूध, फूल आदि पूजा सामग्री चढ़ाएं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप करते रहें। शिवलिंग पर केतकी के फूल, हल्दी और सिंदूर चढ़ाना वर्जित होता है। तो ये चीजें न चढ़ाएं। वहीं शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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