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Mahakumbh 2025: हिंदू धर्म ग्रंथों-पुराणों में क्या है महाकुंभ का महत्व? जानिए यहां

 Published : Jan 20, 2025 08:45 am IST,  Updated : Jan 20, 2025 08:45 am IST

महाकुंभ 12 साल बाद प्रयागराज में लगा है। यह धार्मिक मेला सदियों के चलता आ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इसके स्नान के बारे में हिंदू धर्म के ग्रंथों में क्या कहा गया है...

Mahakumbh 2025- India TV Hindi
महाकुंभ Image Source : INDIA TV

12 वर्षों बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में महाकुंभ-2025 मेले का आयोजन हो रहा है। महाकुंभ में शाही स्नान (अमृत स्नान) का खास माना गया है, जो महज 3 दिन 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी को होना है। 14 जनवरी को पहला अमृत स्नान हो चुका है, अब जल्द दूसरे अमृत स्नान की बारी है। पहले अमृत स्नान के दिन 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई थी। महाकुंभ का इतिहास सदियों पुराना है। माना जाता है कि सतयुग काल से ही महाकुंभ का आयोजन होता आ रहा है। इसमें यक्ष, गंधर्व, देवी-देवता, ऋषि-मुनि, साधु, संन्यासी सभी शामिल होते हैं। आइए जानते हैं कि हिंदू धर्म ग्रंथों में महाकुंभ का महत्व क्या बताया गया है...

अलग-अलग पुराणों में गंगा स्नान का महत्व

ऋषि वेद व्यास ने अलग-अलग पुराणों में गंगा स्नान के महत्व की जानकारी दी है। भविष्य पुराण में कहा गया कि गंगा स्नान पापों का धुल देता है। ब्रह्म पुराण कहता है कि कुंभ जैसे विशेष पर्व और तिथियों में गंगा स्नान से अश्वमेघ यज्ञ जैसा फल प्राप्त होता है। अग्नि पुराण में कहा गया कि कुंभ स्नान गोदान के सामान पवित्र है। जबकि स्कंद पुराण में कुंभ के दौरान स्नान को मनवांचित इच्छा फल पाने का जरिया कहा गया।

ब्रह्मवैवर्त पुराण कहता है, माघ मास में प्रयागराज में नदी स्नान करने वाले जातक सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसके पितृ भी खुश होते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में गंगा स्नान के बारे में कहा गया है कि, पवित्र समय में गंगा में स्नान करने वाला शख्स पुण्य प्राप्त कर बैकुण्ठ धाम जाता है।

गरुड़ पुराण में कहा गया है, हजारों अग्निष्टोम और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ भी कुंभ स्नान के 16वें भाग के बराबर भी नहीं हैं। वहीं, पद्म पुराण में कहा गया, जो व्यक्ति प्रयाग, पुष्कर और कुरुक्षेत्र में स्नान करता है, वह परम धाम को प्राप्त करता है। स्कंद पुराण में कहा गया कि माघ मास में गंगा में स्नान करने वाले शख्स के पितृ युगों-युगों तक स्वर्ग में रहते हैं।

इसके अलावा, कूर्म पुराण में कहा गया कि कुंभ स्नान से पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जातक संकल्प लें आगे कोई भी पाप नहीं करेगा। इस तरह प्रण लेने के बाद ही स्नान करने वाले के पुराने पर कट जाते हैं और पुण्य में बढ़ोतरी होती है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां गंगा ने वचन दे रखा है कि स्नान के समय शुद्ध मन से पाश्चाताप भरे हृदय से अगर को अपने पापों को धुलने के लिए जलाशय या जलस्त्रोत के सामने मेरा स्मरण करेगा और स्नान करेगा तो उस जल में मैं स्वयं आ जाऊंगी। इसके लिए एक श्लोक भी है-

नन्दिनी नलिनी सीता मालती च महापगा।

विष्णुपादाब्जसम्भूता गंगा त्रिपथगामिनी।।
भागीरथी भोगवती जाह्नवी त्रिदशेश्वरी।
द्वादशैतानि नामानि यत्र यत्र जलाशय।
स्नानोद्यत: स्मरेन्नित्यं तत्र तत्र वसाम्यहम्।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

 

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