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Som Pradosh Puja Vidhi: सोमवार और प्रदोष व्रत का शुभ संयोग, इस विधि के साथ करें भगवान शिव की पूजा, पूरी होगी सभी मनोकामना

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 29, 2026 09:49 pm IST,  Updated : Mar 29, 2026 09:49 pm IST

Som Pradosh Puja Vidhi: सोमवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि इस दिन भोलेनाथ की पूजा किस विधि और मंत्र के साथ करनी चाहिए।

सोम प्रदोष व्रत- India TV Hindi
सोम प्रदोष व्रत Image Source : FILE IMAGE

Som Pradosh Vrat Puja Vidhi: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से भोलेनाथ और माता पार्वती की खास कृपा प्राप्त होती है। बता दें कि जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सोम प्रदोष का व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा सोम प्रदोष का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। तो आइए जानते हैं सोम प्रदोष पूजा विधि के बारे में।

सोम प्रदोष पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत के दिन प्रात: काल उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। 
  • इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करें। 
  • इसके बाद शाम यानी प्रदोष काल में फिर से स्नान कर साफ कपड़े पहनें। 
  • फिर शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी और शहद (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, अक्षत (अखंडित चावल), सफेद फूल और भस्म अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
  • सोम प्रदोष की व्रत कथा पढ़ें और अंत में भगवान शिव की आरती करें।
  • प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन चतुर्दशी तिथि के सूर्योदय के बाद करें।

सोम प्रदोष पूजा मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 9 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 31 मार्च को शाम 6 बजकर 55 मिनट पर होगा। प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।

सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव के इन मंत्रों का जाप करें

  • ॐ नमः शिवाय (इस मंत्र का कम से 108 बार जाप करें।)
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ( महामृत्युंजय मंत्र का जाप 11, 21 या 108 बार करें।)
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ (शाम के समय पूजा करते समय इस मंत्र का 108 बार जाप करें।)
  • नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥ (पूजा के अंत में शिव पंचाक्षरी स्तोत्र की इन पंक्तियों का पाठ करें।)

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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