नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने गुरुवार को दिल्ली में हुई अपनी आम सभा की विशेष बैठक (SGM) में लोढ़ा समिति की सिफारिशों को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। BCCI ने लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए इसके पांच विवादित बिंदुओं पर आपत्ति भी जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI ने लोढ़ा समिति की जिन विवादास्पद सिफारिशों का विरोध किया है उनमें, एक राज्य एक वोट, राष्ट्रीय चयनसमिति में सदस्य संख्या की सीमा, बोर्ड परिषद में सदस्य संख्या की सीमा, अधिकारियों की आयु और कार्यकाल को सीमित करना और अधिकारियों की ताकत और कार्यो को विभाजित करना शामिल है।
लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक 70 साल से अधिक आयु के अधिकारी BCCI या किसी राज्य संघ में पद नहीं संभाल सकते। साथ ही समिति ने 2 कार्यकाल के बीच 3 साल के अंतराल की बात भी कही है। अगर सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर फिर से विचार करती है तो BCCI के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन और पूर्व सचिव निरंजन शाह की बोर्ड में वापसी हो सकती है। दोनों अधिकारियों की उम्र 70 साल से ज्यादा है और वह BCCI में लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक कोई पद नहीं ले सकते। अदालत ने अपनी पिछली सुनवाई में कुछ सिफारिशों पर दोबारा विचार करने के संकेत दिए थे। अदालत ने हालांकि इससे पहले इन दोनों अधिकारियों को SGM में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
सरकारी कर्मचारियों और मंत्रियों को बोर्ड में शामिल न करने की सिफारिश का भी BCCI ने विरोध किया था, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा करने से रेलवे का प्रतिनिधित्व करने वाला नहीं होगा। BCCI की शीर्ष परिषद का संविधान भी विवाद का मुद्दा है। प्रस्तावित शीर्ष परिषद के आकार पर BCCI के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने कहा, 'फिलहाल इसका प्रस्तावित आकार 5 सदस्यों का है। इसमें सिर्फ एक उपाध्यक्ष है और सदस्यों का नजरिया है कि देश के आकार को देखते हुए इसका आकार छोटा है।' चौधरी ने कहा कि वे अब भी हितों का टकराव मुद्दे को सुलझाने की प्रक्रिया में हैं क्योंकि सदस्यों को कुछ आपत्तियां हैं। BCCI ने इस दौरान लोकपाल की भूमिका के लिए नामों का पैनल भी तैयार किया है।