2. विकेट के पीछे ही नहीं बल्कि आगे भी दिखाया कमाल

भारतीय क्रिकेट में महेन्द्र सिंह धोनी ने साबित कर दिया कि विकेटकीपर की भूमिका महज़ विकेट के पीछे बॉल रोकना और कैच पकड़ना ही नहीं बल्कि बल्लेबाज़ी से टीम को जिताने की भी होती है। टेस्ट , वन-डे या फिर टी20 हो, धोनी ने कई बार अपने बल्ले से मैच का रुख़ ही मोड़ दिया।
टेस्ट मैचों में किसी भारतीय विकेट कीपर द्वारा सबसे तेज़ शतक के अलावा टेस्ट में दोहरा शतक लगाने वाले वह इकलौते भारतीय विकेटकीपर हैं। लेकिन वनडे क्रिकेट में जिस तरह से उन्होंने अनेकों बार मैच जिताए हैं वो शायद क्रिकेट के इतिहास में किसी ने नहीं किया। उन्होंने सिखाया कि कि हारे हुए मैच को कैसे जीता जाता है। यही वजह है कि धोनी वनडे में दुनिया के बेस्ट फिनिशर कहलाते हैं।