नई दिल्ली: किसी भी क्रिकेटर के लिये देश की अगुवाई करना गर्व की बात होती है लेकिन जब आप अपने घरेलू मैदान पर अपने लोगों के सामने कप्तानी करते हो तो यह उस खिलाड़ी के लिये विशेष बन जाता है। भारतीय टेस्ट कप्तान विराट कोहली कल जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फिरोजशाह कोटला में पहली बार टीम की अगुवाई करेंगे तो निश्चित तौर पर उन पर भावनाओं का ज्वार हावी रहेगा।
इस 27 वर्षीय क्रिकेटर ने कुछ पुरानी यादों को ताजा किया जब उन्होंने यहां ट्रायल मैच में आयु वर्ग की टीम की तरफ से शतक जड़ा और फिर इसी मैदान पर वनडे सैकड़ा बनाया। कोहली ने कोटला पर कप्तानी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘मेरी क्रिकेट की शुरूआत यहां राज्य की टीम से हुआ था। मैंने अपना पहला रणजी मैच यहीं पर खेला था। इस मैदान से विशेष यादें जुड़ी हैं। अपने घरेलू मैदान पर भारतीय टीम की कप्तानी करना मेरे लिये विशेष मौका है।’
उन्होंने कहा कि यही वह मैदान है जहां सब कुछ मेरे अनुकूल हुआ। इसी मैदान पर मैंने ट्रायल मैच में शतक लगाया था। तब सभी चयनकर्ता और प्रशासक देख रहे थे और संभवत: वे उससे प्रभावित हुए। पहले साल नकार दिये जाने के बाद मैंने इस तरह से टीम में जगह बनायी। इस मैदान पर वास्तव में मैंने अपना करियर शुरू होते हुए देखा।
इस मैदान पर अपनी उपलब्धियों के बारे में कोहली ने कहा कि रणजी ट्रॉफी में पदार्पण विशेष दिन था। मैंने यहां आईपीएल और वनडे में कई रन बनाये हैं। मैंने वेस्टइंडीज के खिलाफ यहां 70 गेंदों के आसपास शतक जड़ा था। मैं वास्तव में इस मैदान को खास मानता हूं। मैं यहां बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। कोहली ने कहा कि देश की तरफ से खेलना ही बड़ी उपलब्धि है लेकिन घरेलू मैदान पर टीम की अगुवाई करना कभी किसी खिलाड़ी का लक्ष्य नहीं होता है।
उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में यह दिन आएगा। जब आप क्रिकेटर के रूप में शुरूआत करते हो तो आपका सपना भारत की तरफ से खेलना होता है। लेकिन कप्तानी ऐसी चीज है जिसको आप कभी लक्ष्य नहीं बनाते हो। मैं जिम्मेदारी समझता हूं और मैं भाग्यशाली रहा कि मैंने विभिन्न स्तरों पर कप्तानी की है। इसलिए मुझे यह पसंद है और मैं इसका आनंद लेता हूं।’