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टीम इंडिया की कमजोर कड़ी, ऑफ स्पिन के सामने फंस रही टीम इंडिया, सुपर-8 में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

 Written By: Vanson Soral @VansonSoral
 Published : Feb 19, 2026 02:57 pm IST,  Updated : Feb 19, 2026 03:00 pm IST

भारतीय टीम ने T20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में बेहतरीन खेल दिखाया। अब सुपर-8 में टीम इंडिया की टक्कर साउथ अफ्रीका से होगी।

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टीम इंडिया Image Source : AFP

ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया ने अब तक शानदार खेल दिखाया है। ग्रुप स्टेज में चारों मुकाबले जीतकर सूर्याकुमार यादव की अगुवाई वाली टीम बेहतरीन लय में है, जिसमें पाकिस्तान पर बड़ी जीत भी शामिल है। हालांकि, 4-0 का रिकॉर्ड उन कमजोरियों को पूरी तरह छिपा नहीं पा रहा है, जो बीच-बीच में उजागर हुई हैं। खासकर ऑफ स्पिन के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का संघर्ष।

USA के खिलाफ पहले मैच में भारत का पावरप्ले खराब रहा और टीम के 4 बल्लेबाज महज 46 रन पर गिर गए। नामीबिया के खिलाफ स्थिति थोड़ा संभली, लेकिन मिडिल ओवर्स में रन गति थम गई। सूर्या–तिलक वर्मा की साझेदारी ने टिककर खेला, लेकिन पारी उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ सकी। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन के तेज 77 रन के बावजूद 7 से 14 ओवर के बीच भारत की रन गति धीमी रही। नीदरलैंड्स के खिलाफ भी यही कहानी दोहराई गई। इस मैच में बीच के ओवरों में 62 रन पर तीन विकेट गिरे।

स्पिनर्स के सामने उजागर हुई कमी

कुल मिलाकर देखें तो ग्रुप स्टेज के सभी चार मैचों में भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स के खिलाफ जूझते नजर आए हैं। फिर चाहे बात हो अमेरिका के स्पिनर मोहम्मद मोहसिन और हरमीत सिंह की या फिर नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरासमस की। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भी सैम अयूब ने भारतीय गेंदबाजों को खासा परेशान किया। ऐसा लगा जैसे भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ विपक्षी टीमों ने पूरी प्लानिंग से गेंदबाजी की है। नीदरलैंड के बास डे लीडे ने माना कि पाकिस्तान मैच से सीख लेकर उन्होंने स्पिन पर फोकस किया और गेंद की रफ्तार कम रखी। यही वजह रही कि डच स्पिनर एक समय भारतीय बल्लेबाजों पर दवाब बनाने में काफी हद तक सफल हो गए।

भारतीय टीम की सबसे बड़ी चिंता ऑफ स्पिन के खिलाफ स्ट्राइक-रेट है। दरअसल, ऑफ स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ भारत का स्कोरिंग रेट कुछ खास नहीं रहा है। सूर्या और तिलक के लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन का भी अब तक कोई फायदा नहीं हुआ है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो सुपर-8 में टीम इंडिया के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है। असिस्टेंट कोच सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने भी माना कि इस वर्ल्ड कप में मिडिल फेज में बल्लेबाजी कठिन रही है और फिंगर-स्पिनर्स असरदार साबित हो रहे हैं।

सुपर-8 में दिखाना होगा बेहतर खेल

अब सुपर-8 में भारत की टक्कर साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे से है। 22 फरवरी को अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबला पहली बड़ी परीक्षा होगा। विरोधी टीमों की योजना साफ होगी कि पावरप्ले के बाद रफ्तार कम करो और ऑफ स्पिन से टीम इंडिया पर दबाव बनाओ। ग्रुप स्टेज में कमियां साफ नजर आई हैं और सुपर-8 में यही छोटी दरारें बड़ी चुनौती बन सकती हैं। अब सवाल है कि क्या टीम इंडिया समय रहते इस कमजोरी का इलाज ढूंढ पाएगी?

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