नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीज) की बिजली की मांग बढ़ने से बिजली कंपनियों को साल 2030 तक 11 अरब डॉलर (700 अरब रुपये) का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। एसोचैम और ईवाई के संयुक्त अध्ययन में गुरुवार को यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में ईवीज का इस्तेमाल बढ़ने से देश के बिजली क्षेत्र को काफी लाभ होगा। अध्ययन में कहा गया, "इीवीज द्वारा बिजली की मांग बढ़ने से इस क्षेत्र को धीमी वृद्धि दर से निकलने में मदद मिलेगी।"
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रिपोर्ट के मुताबिक, ईवीज से पैदा होने वाली बिजली की कुल मांग साल 2020 तक करीब 79.9 गीगावॉट घंटों (जीडब्ल्यूएच) की होगी तथा साल 2030 तक इसके 69.6 टेरावॉट घंटों (टीडब्ल्यूएच) तक पहुंचने का अनुमान है।
अध्ययन में बताया गया है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के आने से पीएंडयू (बिजली और उपभोक्ता सेवाएं) क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और मांग और आपूर्ति दोनों में वृद्धि होगी। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि ईवीज से देश को कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।