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क्या है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगा ILS सिस्टम? कोहरे में भी फ्लाइट Safely होगी लैंड

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Mar 26, 2026 09:51 am IST,  Updated : Mar 26, 2026 09:51 am IST

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम देश के उन आधुनिक एयरपोर्ट की लिस्ट में शुमार हो गया है, जहां एडवांस ILS सिस्टम लगा है। दिल्ली NCR का यह तीसरा एयरपोर्ट होगा, जो 28 मार्च को उद्घाटन के लिए तैयार है।

Noida International Airport, ILS System- India TV Hindi
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ILS सिस्टम Image Source : PTI

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जल्द शुरू होने वाला है। 28 मार्च को पीएम मोदी दिल्ली से सटे इस एडवांस टेक्नोलॉजी वाले एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। इसके एंट्री गेट और पैसेंजर लाउंज से लेकर रनवे तक में सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी यूज की गई है। इस एयरपोर्ट पर Digiyatra के जरिए पेपरलेस चेक-इन की सुविधा मिलेगी। वहीं, यहां से उड़ान भरने और लैंड होने वाले फ्लाइट्स के लिए ILS सिस्टम लगाया गया है। खास तौर पर सर्दियों और खराब मौसम में भी फ्लाइट्स सुरक्षित तरीके से यहां लैंड कर पाएगी। 

क्या है यह ILS सिस्टम?

एयरपोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, ILS यानी इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम एक सटीक रेडियो नेविगेशन टेक्नोलॉजी है, जो विमानों को खराब मौमस, रात के अंधेरे, लो विजिबिलिटी में सुरक्षित रनवे पर लैंड करने में मदद करता है। इसमें मुख्य तौर पर तीन प्राइमरी कंपोनेंट Localizer, Glide Path और Markers होते हैं।

Localizer को रनवे के आखिर में लगाया जाता है। यह एक ट्रांसमीटर और एंटिना से जुड़ा रहता है और रनवे पर एक सेंटरलाइन बनाता है। इसकी मदद से लैंडिंग के वक्त विमान को सीधा रखने में मदद मिलती है।

Glide Path रनवे के पास स्थित होता है, जो विमान को उतरने के समय सही कोण बनाने में मदद करता है। वहीं, Markers को अलग-अलग दूरी पर लगाया जाता है, तो रनवे की तरफ अप्रोच कर रहे फ्लाइट्स को लैंडिंग स्पॉट के बारे में अवगत कराते हैं। इसमें DME यानी डिस्टेंस मेजरिंग इक्विपमेंट लगे होते हैं।

ILS System
Image Source : AAIILS सिस्टम

इन तीनों कंपोनेंट्स के अलावा ILS सिस्टम से लैस एयरपोर्ट में अप्रोच लाइटिंग सिस्टम भी लगाया जाता है, जो खास तौर पर रात के अंधेरे में फ्लाइट्स को रनवे पर लैंड कराने में मदद करता है। वहीं, रनवे पर RVR यानी रनवे विजुअल रैंज भी लगाया जाता है, ताकि पायलट को लो विजिबिलिटी में भी रनवे का सटीक स्पॉट पता चलता है।

तीन कैटेगरी में बंटा है सिस्टम

ILS सिस्टम को मुख्यतः तीन कैटेगरीज CAT I, CAT II और CAT III में बांटा गया है। CAT I वाले एयरपोर्ट्स पर सामान्य तौर पर खराब मौसम में लैंडिंग की जा सकती है। इसमें 200 फीट की अधिक ऊंचाई से 800 मीटर की विजिबलिटी होने पर लैंडिंग संभव है। वहीं, CAT II कैटेगरी वाले एयरपोर्ट पर 100 से 200 फीट की ऊंचाई और 300 मीटर की विजिबिलिटी होने पर भी लैंडिंग कराई जा सकता है।

नोएडा एयरपोर्ट को CAT III यानी सबसे एडवांस ILS सिस्टम से लैस किया गया है। इसमें बेहद कम विजिबिलिटी यानी 50 मीटर की भी विजिबिलिटी में विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव है। इसमें ऑटोमैटिक लैंडिंग की जा सकती है। यह घने कोहरे, बारिश आदि में भी विमान को सुरक्षित लैंडिंग करा सकता है।

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