Privatization of IDBI Bank : एसबीआई के आर्थिक शोध विभाग ने रिपोर्ट में कहा कि उम्मीद है कि सरकार बजट में आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के संबंध में स्पष्टता लाएगी।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार से व्यापार करने की लागत को कम करने के लिए भूमि पर स्टांप शुल्क को तर्कसंगत बनाने और बिजली दरों पर क्रॉस-सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का अनुरोध किया है।
लेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजना के तीसरे संस्करण के अनावरण को लेकर उम्मीदें बहुत अधिक हैं। नई सब्सिडी व्यवस्था कम से कम दो से तीन साल तक चलने की है मांग।
उद्योग ने कम से कम आठ सालों की अवधि के लिए 40,000-45,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक्स घटक प्रोत्साहन योजना की भी मांग की है। फिलहाल भारत में चीन और वियतनाम जैसी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च टैरिफ वाली कई टैरिफ लाइनें हैं।
Budget 2024 : उत्पाद असेंबल करने में लगने वाले कलपुर्जे और कच्चे माल पर 2.5 प्रतिशत शुल्क दरें हटाने का भी सुझाव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ये शुल्क दरें किसी उद्देश्य को पूरा नहीं करती हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश स्थिरता पर केंद्रित होगा, जिसका उद्देश्य परिवहन नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और पर्यावरणीय परिणामों में सुधार करना है। चुनावों के बाद से भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है, जो हर हफ्ते धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है।
देश का माल और सेवाओं का निर्यात 2017-18 में 478 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023-24 में 778 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। सभी एमएसएमई निर्माता निर्यातकों को 3 प्रतिशत की दर से ब्याज समतुल्यकरण लाभ प्रदान करती है।
मंत्रालय की मई, 2024 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की 1,817 परियोजनाओं में से 458 की लागत बढ़ गई है, जबकि 831 अन्य परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।
अदानी ने कहा कि अगले दशक में हम ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में 100 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करेंगे और अपनी एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य सीरीज का और विस्तार करेंगे। गौतम अदानी ने कहा कि बीते 30 वर्षों में हमने काफी कुछ हासिल किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी 1,838 परियोजनाओं में 448 की लागत में बढ़ोतरी हुई है और 792 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन 1,873 प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन की मूल लागत 26,87,535.69 करोड़ रुपये थी लेकिन अब इसके बढ़कर 31,88,859.02 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि इन प्रोजेक्ट्स की लागत 18.65 प्रतिशत यानी 5,01,323.33 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
कमजोर ग्लोबल डिमांड की चुनौतियों के बीच मजबूत बुनियाद के साथ घरेलू आर्थिक गतिविधियां 2023-24 की पहली छमाही में मजबूत रही हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 37.5 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की संयुक्त राष्ट्र ने जमकर सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत में तेजी से हुए बुनियादी ढांचे में निवेश से गरीबी दूर होने के मॉडल की भी प्रशंसा की है। बता दें कि डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में भारत का दुनिया लोहा मान रही है।
रिपोर्ट के अनुसार देरी वाली 764 परियोजनाओं में औसत विलम्ब 36.27 महीने का है। परियोजनाओं में देरी भूमि अधिग्रहण में विलम्ब, वन और पर्यावरण मंजूरी में देरी समेत अन्य कारणों से हुई है।
कई ऑटोमोबाइल कंपनियों की कहना है कि ग्रीन मोबिलिटी के लिए नीतिगत प्रोत्साहन पर सरकार का मुख्य फोकस बना रहना चाहिए, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
देरी से चल रही 837 परियोजनाओं में से 202 में एक महीने से लेकर एक साल तक की विलंब बै जबकि 188 में 13-24 महीने की देरी है। वहीं 324 परियोजनाएं पांच साल तक की देरी से चल रही हैं जबकि 123 परियोजनाओं में पांच साल से भी अधिक विलंब हो चुका है।
चीन ने एलएसी पर सड़कों, हवाई अड्डों और हेलीपैड का बड़ा नेटवर्क तैयार कर दिया है। चीन ने इस बुनियादी ढांचे का विकास नियंत्रण रेखा पर गलवान और तवांग में भारतीय सैनिकों के साथ झड़प के बाद किया है। साथ ही सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी है। पेंटागन की रिपोर्ट में दावा है कि चीन ने भारत सी लगी सीमा पर नए गांव बसाए हैं।
देरी से चल रही 815 परियोजनाओं में से 193 परियोजनाएं एक महीने से 12 महीने, 192 परियोजनाएं 13 से 24 महीने की, 293 परियोजनाएं 25 से 60 महीने की और 137 परियोजनाएं 60 महीने से अधिक की देरी से चल रही हैं।
रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत ने कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार भारत में सड़कों का नेटवर्क अब अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है। चीन, जापान, जर्मनी, इटली और फ्रांस, आस्ट्रेलिया जैसे देशों को भारत ने बहुत पीछे छोड़ दिया है। यह सब पीएम मोदी के 9 वर्षों के कार्यकाल में हुआ।
अमेरिका ने चीनी साजिश का बड़ा पर्दाफाश किया है। अमेरिका के दावे के अनुसार चीनी हैकर्स उसके रेल नेटवर्क समेत पाइपलाइन परियोजनाओं और महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचों पर साइबर हमला करने के फिराक में थे और अभी भी हैं।
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