प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार यूएनएससी में सदस्यता विस्तार नहीं होने पर सबसे तीखा हमला बोला है। पीएम मोदी ने कहा कि यूएनएससी में सुधार अब विकल्प की जगह, अनिवार्यता बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर सुधारों को लेकर दहाड़ लगाई है। भारत ने कहा कि 80 साल पुरानी व्यवस्था को अब बदलने का वक्त आ गया है।
पीएम मोदी की यात्रा के दौरान त्रिनिदाद और टोबैगो ने खुलकर संयुक्त राष्ट्र में भारत को स्थाई सदस्य बनाने जाने की मांग का समर्थन किया है।
एक महीने के लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान संभालने का मौका मिला है। यूएनएससी का अध्यक्ष बनने के बाद वो क्या क्या काम करेगा, भारत का उसपर क्या असर पड़ेगा, जानें पूरी डिटेल्स...
भारत ने 33 देशों को इसलिए चुना क्योंकि वे या तो UNSC के सदस्य हैं, क्षेत्रीय और वैश्विक रूप से प्रभावशाली हैं, या भारत के रणनीतिक साझेदार हैं। इन प्रतिनिधिमंडलों को भेजने का उद्देश्य पाकिस्तान को बेनकाब कर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाना है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में धर्म और आस्था को आधार बनाने वालों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सुधारों को रोकने का प्रयास है।
स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने यूएनएससी में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया। राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने कहा कि हम भारत का पूर्ण समर्थन करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता में वृद्धि नहीं करने के मामले पर भारत ने फिर इसके सदस्यों को फटकार लगाई है। भारत ने विशेषकर चीन को उसका नाम लिए बिना जमकर धोया है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ठोस सुधार की कड़ी वकालत की है। भारत का कहना है कि बार-बार स्थाई सदस्यता में सुधार की मांग उठाए जाने के बावजूद परिषद की ओर से 1965 से अब तक टाल-मटोल होता आ रहा है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत वीटो पावर के साथ यूएनएससी का स्थायी सदस्य बन गया है। आइये जानते हैं वायरल हो रही इस पोस्ट के दावे का का पूरा सच क्या है?
भारत के पड़ोसी देश भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जमकर हिंदुस्तान की तारीफ की है। भूटान के पीएम शेरिंग तोबगे ने भारत को आर्थिक महाशक्ति और ग्लोबल साउथ की आवाज बताते हुए यूएनएससी में स्थाई सदस्यता का प्रबल हकदार बताया है।
भारत, सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयासों में अग्रणी रहा है तथा उसका कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की परिषद 21वीं सदी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उपयुक्त नहीं है। उसका मानना है कि यह समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती।
अमेरिका ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाए जाने और यूएनएससी में सुधार का समर्थन किया है। बाइडेन ने पीएम मोदी से यह बात साझा की। इसके साथ ही उन्होंने शांति के लिए पीएम मोदी की रूस और यूक्रेन यात्रा की भी सराहना की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयॉर्क में होने वाली बैठक से पहले अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार प्रस्ताव को पेश करके यह साफ कर दिया है कि इस महासम्मेलन में बहस का सबसे बड़ा मुद्दा भारत जैसे देशों को स्थाई सदस्यता देने का ही रहने वाला है। अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है।
भारत को लंबे समय से यूएनएससी में स्थाई सदस्यता की दरकार है। मगर चीन हर बार रोड़े अटकाता रहा है। लिहाजा भारत समेत कई देशों ने अब यूएनएससी पर सुधार का दबाव बनाया है। भारत ने मजबूती से स्थाई सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मे मंगलवार को बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट जरूर मिलेगी। पूरी दुनिया में इस बात को लेकर भावना बढ़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत ने जी-4 देशों का विस्तृत मॉडल पेश किया है। इसे भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील की ओर से तैयार किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई और गैर-स्थाई सदस्यों की संख्या और नियमों में सुधार की बात कही गई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत ने फिर यूएनएसी को फटकार लगाई है। भारत ने कहा है कि कब तक 188 देशों की आवाज को दबाते रहेंगे। यूएनएससी में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कांबोज ने स्थाई सदस्यता का मुद्दा उठाया।
बीते लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार और संशोधनों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक इसमें कोई भी बदलाव नहीं आया है। अब दिग्गज कारोबारी एलन मस्क नमे भी इस मामले में बड़ा बयान दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ डेनिस फ्रांसिस की यात्रा के दौरान बातचीत में विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए भारत का आह्वान दोहराया जाएगा, ताकि इस वैश्विक संस्था में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर इसे अधिक न्यायसंगत बनाया जा सके।’’
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