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संभल हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा, सूत्रों ने बताया- तुर्क VS पठान की लड़ाई में भड़का बवाल, 4 की मौत

 Reported By: Vishal Pratap Singh, Edited By: Malaika Imam
 Published : Nov 26, 2024 11:09 am IST,  Updated : Nov 26, 2024 12:03 pm IST

संभल में भड़की हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि हिंसा सुनियोजित थी और इसके पीछे तुर्क और पठान समुदाय के बीच वर्चस्व की खूनी लड़ाई थी।

संभल में बड़ी हिंसा पर बड़ा अपडेट- India TV Hindi
संभल में बड़ी हिंसा पर बड़ा अपडेट Image Source : PTI

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में यह सामने आया है कि हिंसा सुनियोजित थी और इसके पीछे तुर्क और पठान समुदाय के बीच वर्चस्व की खूनी लड़ाई थी, जिसने चार जिंदगियों को निगल लिया, जिनमें सभी पठान विधायक इकबाल महमूद अंसारी के समर्थक थे। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के मुख्य कारणों में तुर्क बनाम पठान और देसी बनाम विदेशी के मुद्दे को हवा दी गई। इसके कारण दोनों समुदायों के समर्थकों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया।

हिंसा की चिंगारी उस वक्त भड़क उठी जब तुर्क समुदाय के सांसद समर्थकों ने पठान समुदाय के विधायक इकबाल महमूद अंसारी के समर्थकों पर गोलियां चला दीं। इस गोलाबारी में पठान, सैफी और अंसारी समुदाय के लोग मारे गए। एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में ये खूनी खेल हुआ। अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि पुलिस की गोली से कोई हताहत नहीं हुआ और मारे गए सभी नागरिक विधायक के समर्थक थे।

सांसद और विधायक के बेटे पर मकदमा

वहीं संभल हिंसा में अब तक सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा के मामले में समाजवादी पार्टी (SP) के क्षेत्रीय सांसद जियाउर्रहमान बर्क और संभल सदर सीट से सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल का नाम सामने आया है। पुलिस ने हिंसा में घायल हुए दारोगा दीपक राठी के बयान पर 800 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें बर्क और सुहेल इकबाल को नामजद किया गया है।

कैसे हुई हिंसा की शुरुआत? पुलिस ने बताया

संभल पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि हिंसा की शुरुआत तुर्क और पठान समुदाय के बीच तनाव से हुई, जिसमें बर्क और उनके समर्थकों ने भड़काऊ बयान दिए थे। बर्क को पहले भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 168 के तहत नोटिस दिया गया था, जिसमें उन्होंने जामा मस्जिद के संरक्षण को लेकर उकसाने वाली बातें की थीं। विश्नोई ने बताया कि यह हिंसा उस वक्त हुई जब जामा मस्जिद का सर्वेक्षण हो रहा था और उसके बाद पथराव और गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं।

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