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12 घंटे की शिफ्ट और कम वेतन का खौफ? फैक्ट्रियों में अब बदलेगा काम का अंदाज, नए लेबर कोड के पीछे का असली खेल समझें

Edited By: Shivendra Singh
Published : Dec 27, 2025 07:54 am IST, Updated : Dec 27, 2025 07:54 am IST

भारत के श्रम बाजार में साल 2026 एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है। पिछले पांच साल से अटके पड़े लेबर रिफॉर्म्स अब जमीन पर उतरने की तैयारी में हैं। चार नए लेबर कोड की बात कर रही है, वहीं मजदूर संगठनों के बीच 12 घंटे की शिफ्ट, नौकरी की अनिश्चितता और कम वेतन का डर गहराता जा रहा है।

लेबर कोड से बदलेगी...- India TV Hindi
Image Source : CANVA लेबर कोड से बदलेगी फैक्ट्री की तस्वीर!

भारत में कामकाजी दुनिया एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। ऑफिस से लेकर फैक्ट्रियों तक, हर कर्मचारी और नियोक्ता के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि क्या अब 12 घंटे की शिफ्ट आम हो जाएगी? क्या सैलरी और हक पहले जैसे रहेंगे या उनमें कटौती का खतरा है? दरअसल, 2026 से पूरी तरह लागू होने जा रहे नए लेबर कोड को लेकर यही आशंकाएं और उम्मीदें साथ-साथ चल रही हैं।

करीब पांच साल के इंतजार के बाद केंद्र सरकार ने चारों लेबर कोड्स के नियमों को लागू करने की तैयारी कर ली है। ये कोड 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर एक नया ढांचा तैयार करते हैं, जिसका दावा है कि यह मौजूदा आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक है। सरकार का कहना है कि इससे श्रमिकों को न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी मिलेगी और संगठित व असंगठित दोनों सेक्टर के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा।

सरकार का नया फोकस

सरकार के मुताबिक 2025 श्रम सुधारों के लिए एक टर्निंग पॉइंट रहा है। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि अब फोकस सिर्फ कानून बनाने पर नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने पर होगा। इसी कड़ी में 2026 में EPFO 3.0 लाने की प्लानिंह है, जिससे पीएफ निकासी, पेंशन फिक्सेशन और बीमा क्लेम पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगे।

यूनियनों का कड़ा विरोध

लेकिन जहां सरकार और उद्योग जगत इसे ऐतिहासिक सुधार बता रहे हैं, वहीं ट्रेड यूनियनें इसे मजदूर विरोधी करार दे रही हैं। यूनियनों का आरोप है कि नए लेबर कोड के जरिए काम के घंटे बढ़ाने और नियोक्ताओं को ज्यादा छूट देने की तैयारी है। 12 घंटे की शिफ्ट की चर्चा ने इसी डर को और हवा दी है। यूनियनों का कहना है कि इससे कामगारों पर दबाव बढ़ेगा और जॉब सिक्योरिटी कमजोर होगी। इसी विरोध में फरवरी 2026 में देशव्यापी हड़ताल का ऐलान भी किया गया है।

उद्योग जगत की उम्मीदें

दूसरी ओर, उद्योग जगत का तर्क है कि नए कोड से अनुपालन आसान होगा, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। CII और एम्प्लॉयर्स फेडरेशन जैसे संगठनों का मानना है कि आधुनिक नियमों से वर्कप्लेस ज्यादा प्रोफेशनल और सुरक्षित बनेगा, साथ ही सोशल सिक्योरिटी का दायरा भी बढ़ेगा।

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