उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से चिकित्सा जगत में एक ऐसी अनोखी और बेहद दुर्लभ चिकित्सा सफलता की कहानी सामने आई है। जिसके बाद कानपुर के ह्रदयरोग डॉक्टरों का मनोबल सातवें आसमान पर है।
कानपुर के प्रतिष्ठित एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान (हृदय रोग संस्थान) के डॉक्टरों ने संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉक्टर राकेश कुमार वर्मा के सुपरविजन में ये कारनामा कर के दिखाया, ऐसे में टीम ने फतेहपुर की मात्र 12 वर्षीय मासूम बच्ची लक्ष्मी पटेल को मौत के बहुत करीब से वापस लाकर नई जिंदगी प्रदान की है।
इलाज से पहले हुई जांच में पता चला कि बच्ची के दिल के दाहिने एट्रियम (राइट एट्रियम) में टीबी (क्षय रोग) के संक्रमण से 10×10 सेंटीमीटर की एक भयानक विशाल गांठ बन गई थी, जो दिल के ट्राइकस्पिड वाल्व को पूरी तरह ढक चुकी थी और शरीर में खून के सामान्य संचार को लगभग बंद कर दिया था।
संस्थान के निदेशक एवं सीनियर कार्डियो-थोरैसिक सर्जन प्रो. डॉक्टर राकेश वर्मा ने बताया कि दिल के अंदर इतनी बड़ी टीबी गांठ के साथ-साथ दिल की बाहरी सुरक्षा झिल्ली (पेरिकार्डियम) का 1 सेंटीमीटर तक मोटा होना दुनिया के किसी भी मेडिकल लिटरेचर में अब तक रिपोर्ट नहीं हुआ है। इसलिए इस केस को विश्व का पहला मामला माना जा रहा है। पूरी रिपोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशन के लिए भेज दी गई है, जहां से इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
बच्ची की हालत थी बेहद नाजुक
जानकारी के अनुसार, फतेहपुर जिले के खंडदेवर गांव की रहने वाली लक्ष्मी पटेल को 24 फरवरी 2026 को संस्थान के सीवीटीएस विभाग में भर्ती किया गया था। उस समय बच्ची की स्थिति बेहद गंभीर थी। वह बैठे-बैठे भी सांस लेने में काफी तकलीफ महसूस कर रही थी। पूरे शरीर में भारी सूजन आ गई थी, खासकर दोनों पैरों में। दिल की धड़कन अनियमित हो गई थी और हृदय के चारों ओर पानी जमा होने के लक्षण साफ दिख रहे थे। परिवार के सदस्य बेहद परेशान थे क्योंकि सामान्य दवाओं और इलाज से कोई सुधार नहीं हो रहा था।
इको जांच में हुआ हैरान करने वाला खुलासा
जब डॉक्टरों ने लक्ष्मी की ट्रांसथोरासिक इको (TTE) और ट्रांसएसोफेजियल इको (TEE) जांच की तो रिपोर्ट देखकर पूरी मेडिकल टीम स्तब्ध रह गई। दिल के दाहिने हिस्से में 10×10 सेमी की विशाल गांठ मौजूद थी, जो वाल्व को पूरी तरह ब्लॉक कर चुकी थी। इससे रक्त प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। साथ ही दिल की बाहरी झिल्ली (पेरिकार्डियम) भी असामान्य रूप से मोटी होकर 1 सेंटीमीटर तक पहुंच गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्यूमर समझा जा रहा था, लेकिन आगे की जांच और बायोप्सी में साफ हो गया कि यह टीबी का गंभीर संक्रमण था।
हार्ट-लंग मशीन पर 4 घंटे चला जटिल ऑपरेशन
बच्ची की जान बचाने के लिए 14 मार्च को हाई रिस्क सर्जरी का फैसला लिया गया। प्रो. डॉ. राकेश वर्मा के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने लक्ष्मी को हार्ट-लंग मशीन (कार्डियो-पल्मोनरी बाईपास) पर रखा और दिल की धड़कन अस्थायी रूप से रोक दी। ऑपरेशन के दौरान सबसे पहले दिल के ऊपर जमी हुई अत्यधिक मोटी और सख्त झिल्ली को बड़ी धमनियों से बेहद सावधानीपूर्वक अलग किया गया। इसके बाद दिल की दीवार को खोलकर उस विशाल गांठ को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया में लगभग 4 घंटे का समय लगा।
ऑपरेशन के तुरंत बाद गांठ की बायोप्सी कराई गई, जिसकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यह कोई कैंसर या ट्यूमर नहीं, बल्कि टीबी का संक्रमण था। डॉ. राकेश वर्मा ने कहा, “हमने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी उपलब्ध मेडिकल जर्नल्स और केस स्टडीज खंगालीं, लेकिन ऐसा कोई केस कहीं नहीं मिला। यह संस्थान के लिए बेहद गर्व की बात है।”
बच्ची अब स्वस्थ और खुशहाल
सर्जरी के बाद लक्ष्मी की हालत में तेजी से सुधार आया है। सूजन पूरी तरह कम हो गई है, सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं है और वह सामान्य रूप से खा-पी और घूम-फिर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है और बहुत जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। लक्ष्मी के परिवार वाले पूरे मेडिकल स्टाफ का लगातार आभार व्यक्त कर रहे हैं।
सफल ऑपरेशन के पीछे पूरी टीम का सामूहिक प्रयास
इस जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफल बनाने में प्रो. डॉ. राकेश वर्मा के साथ डॉ. सौरभ, डॉ. प्रभात, डॉ. श्रीराज और डॉ. लक्ष्मण की टीम ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. चांदनी, डॉ. सूरज, डॉ. उर्वशी, डॉ. निशा और डॉ. दीक्षा ने बेहतरीन सहयोग दिया। हार्ट-लंग मशीन का संचालन डॉ. मुबीन ने संभाला, जबकि नर्सिंग टीम में सुनीता, वैशाली और अनुज ने निरंतर देखभाल की।
यह सफलता न सिर्फ एक मासूम बच्ची के परिवार के लिए खुशी का मौका है, बल्कि पूरे चिकित्सा क्षेत्र के लिए भी एक नई मिसाल पेश करती है। डॉक्टरों का मानना है कि इस केस का विस्तृत अध्ययन और प्रकाशन भविष्य में टीबी से प्रभावित हृदय संबंधी दुर्लभ मामलों के इलाज में नई राह दिखाएगा। यह घटना यह भी साबित करती है कि समय पर सही निदान, उन्नत तकनीक और अनुभवी टीम के साथ टीबी जैसी आम बीमारी भी जटिल रूप लेने पर सफलतापूर्वक ठीक की जा सकती है।
रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव