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अयोध्या में डिप्टी GST कमिश्नर पद से इस्तीफा देने वाले अधिकारी पर गंभीर आरोप, "फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाकर पाई नौकरी"

 Reported By: Ruchi Kumar Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jan 28, 2026 07:07 am IST,  Updated : Jan 28, 2026 07:11 am IST

सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के सगे बड़े भाई डॉ विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Prashant Kumar Singh- India TV Hindi
GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह Image Source : REPORTER INPUT

लखनऊ: यूपी के अयोध्या में पीएम मोदी, अमित शाह और सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के ऊपर बड़ा आरोप लगा है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाई। उन पर आरोप लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि उनका खुद का सगा बड़ा भाई डॉ विश्वजीत सिंह है।

गौरतलब है कि यूपी में एक तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बनाम सरकार की लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इन दोनों मुद्दों को लेकर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया था और कहा था कि सरकार ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अच्छा नहीं किया।

इसके बाद अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह, सीएम योगी के सपोर्ट में आए और उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। लेकिन जब प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा हुआ तो उनके सगे बड़े भाई डॉ विश्वजीत सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। 

इस्तीफा देने वाले प्रशांत कुमार सिंह पर क्या हैं आरोप?

सीएमओ मऊ का डीजी हेल्थ को लिखा एक लेटर सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि शिकायत मिली है कि अयोध्या के डिप्टी GST कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाई है। प्रशांत कुमार सिंह के सगे बड़े भाई डॉ विश्वजीत सिंह ने ये शिकायत की है। इस लेटर में लिखा है कि बार बार बुलाने के बावजूद मेडिकल बोर्ड के आगे प्रशांत कुमार सिंह पेश नहीं हो रहे हैं।

गौरतलब है कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा सोमवार को अचानक इस्तीफा दे दिया गया था। इसके बाद अलंकार ने ये आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था कि सरकार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही है। हालांकि उनके इस्तीफे को सरकार ने स्वीकार नहीं किया बल्कि उन्हें निलंबित कर दिया। 

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