अयोध्या में 22 जनवरी 2024 के दिन इतिहास का स्वर्णिम अध्याय लिखा गया, जब अयोध्या नगरी में करीब 500 साल बाद प्रभु श्रीराम की वापसी हुई। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के मंदिर में रामलला की नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। मध्याह्न में 12 बजकर 29 मिनट पर भगवान राम के बाल स्वरूप के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 84 सेकंड के 'अभिजीत मुहूर्त' के दौरान 'प्राण प्रतिष्ठा' के साथ 'गर्भगृह' में कई अनुष्ठान किए। इस शुभ अवसर पर पीएम मोदी समेत देश भर के तमाम दिग्गज नेता फिल्म, खेल और उद्योग जगत से जुड़े हुए चेहरे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अयोध्या पहुंचे थे।
2 साल पहले आज ही के दिन रामलला अपने नवनिर्मित महल में विराजे थे, तो वह केवल एक मंदिर की स्थापना नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और करोड़ों भारतीयों के अटूट विश्वास की विजय थी। प्राण प्रतिष्ठा के समय मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर था लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह साफ है। इन 2 सालों में राम मंदिर सिर्फ ‘स्थापित' नहीं हुआ, बल्कि उसका स्वरूप भी बदला है। साथ ही बदली है- अयोध्या नगरी।
राम मंदिर बनने के बाद कितनी बदली अयोध्या?
- विकास का केंद्र बनी अयोध्या नगरी- अयोध्या सिर्फ एक तीर्थनगरी नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ी धार्मिक-आर्थिक हब बनकर उभरी है। इन दो वर्षों में आस्था की जिस लहर ने सरयू तट को छुआ, उसने शहर की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना को बदल दिया।
- करोड़ों पर्यटक पहुंचे अयोध्या- राम मंदिर के निर्माण के बाद से अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। रामलला के दरबार में रोजाना 25 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे। 22 जनवरी 2024 को भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह संख्या बढ़कर 80 हजार तक पहुंच गई। त्योहार पर तो यह संख्या डेढ़ से दो लाख तक पहुंच जाती है। अब यहां सिर्फ देशी श्रद्धालु नहीं आते। विदेशी डिप्लोमैट, बौद्ध देशों के प्रतिनिधि, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सांस्कृतिक दूत, प्रवासी भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी आते रहते हैं। पिछले साल जनवरी से जून के बीच ही करीब 23 करोड़ से अधिक पर्यटक रामनगरी पहुंचे थे।
- युवाओ को रोजगार- धार्मिक पर्यटन के अभूतपूर्व प्रवाह से स्थानीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त गति मिली। होटल, धर्मशाला, परिवहन, हस्तशिल्प, फूल-माला, प्रसाद, खानपान और गाइड सेवाओं में जबरदस्त बूम आया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा अयोध्या और आसपास के युवाओं को मिला है। होटल, टैक्सी, माल ढुलाई, हस्तशिल्प, हथकरघा और निजी कंपनियों में युवाओं को अच्छे काम मिल रहे हैं।
- वर्ल्ड क्लास एयरपोर्ट, मॉडर्न स्टेशन- अयोध्या ने आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में लंबी छलांग लगाई। श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए, शहर में बड़े पैमाने पर आधुनिक परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का विकास किया गया। चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कें, अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन का कायाकल्प, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का विस्तार, इन सभी ने अयोध्या को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। अब अयोध्या पहुंचना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक बन गया है। हवाई, रेल या सड़क मार्ग हो, हर रास्ता अब आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
- छोटे व्यापारियों की बदली किस्मत- रामनगरी में पर्यटकों के आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल रही है। मंदिर के आस पास और प्रमुख मार्गों पर पूजा सामग्री, प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों की आय कई गुना बढ़ गई है। रामपथ, कनक भवन, श्री हनुमानगढ़ी मार्ग और आसपास के क्षेत्र अब सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी समृद्ध हो रहे हैं। इससे छोटे व्यापारियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
अयोध्या में 'रामराज्य' आया?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल आज पूरे हो गए हैं। प्राण प्रतिष्ठा के दो साल बाद तस्वीर साफ है। अयोध्या ने पर्यटन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। रोजगार के अवसर 5 गुना बढे हैं। अयोध्या अभी अकेले लगभग 1.5% तक यूपी की GDP में योगदान कर रही है। राम मंदिर ने इतिहास बदला, अयोध्या ने भूगोल बदला और भारत ने सांस्कृतिक आत्मविश्वास पाया है। अयोध्या अब सिर्फ आस्था की नगरी नहीं, भारत की पहचान की प्रयोगशाला बन चुकी है।