बाराबंकी जिले के माती थाना क्षेत्र के टिकरिया गांव में एक कीमती जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। लखनऊ के रहने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर ने भाजपा के एमएलसी अंगद सिंह पर जबरन जमीन कब्जा करने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, एमएलसी ने इन सभी आरोपों को झूठा और एक साजिश बताया है। प्रॉपर्टी डीलर का कहना है कि एमएलसी ने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, मजदूरों को पीटा और वहां चल रहे निर्माण कार्य को तुड़वा दिया।
प्रॉपर्टी डीलर आनंद वर्मा ने अंगद सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
लखनऊ के संजय गांधी पुरम में रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर आनंद वर्मा का कहना है कि टिकरिया गांव में उनकी अपनी एक जमीन है, जिस पर वे कंस्ट्रक्शन का काम करवा रहे थे। आनंद वर्मा के मुताबिक, 3 जून 2026 को एमएलसी और उनके करीब 10-15 साथियों ने अचानक वहां आकर काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट की और वहां बनी एक दीवार को तोड़ दिया। जब इसका विरोध किया गया, तो आरोपियों ने बंदूक दिखाकर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। इसके बाद, 13 जून 2026 की रात को दोबारा हमला हुआ, जहां जेसीबी मशीन लाकर जमीन पर बने दो कमरों और बाउंड्रीवॉल को तोड़ दिया गया। आनंद वर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि अंगद सिंह के ऊंचे राजनीतिक रसूख और सत्ता के प्रभाव के कारण स्थानीय पुलिस भी उनकी कोई सुनवाई या मदद नहीं कर रही है।
अंगद सिंह ने सभी आरोपों को बताया बेबुनियाद
इस पूरे मामले पर भाजपा एमएलसी अंगद सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए असली कहानी सामने रखी है। उनके अनुसार, यह जमीन करीब 14 साल पहले ही बिक चुकी थी। शिकायतकर्ता आनंद वर्मा 'मैपल्स' नाम की एक कंपनी चलाते थे और उन्होंने फरवरी 2012 में ही इस 2,000 स्क्वायर फीट जमीन की रजिस्ट्री दुर्गावती नाम की महिला के नाम कर दी थी, जिसका सरकारी कागजों में दाखिल-खारिज भी हो चुका था। बाद में जब दुर्गावती जी की मृत्यु हो गई, तो वसीयत के अनुसार यह जमीन उनके पांच बच्चों के नाम आ गई।
एमएलसी अंगद सिंह ने बताया कि चूंकि इस जमीन के ठीक पीछे गाटा संख्या 216 में उनका अपना एक प्लॉट है, इसलिए उन्होंने पूरी कानूनी जांच-पड़ताल करने के बाद नियमों के तहत त्रिपाठी परिवार से यह जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। अंगद सिंह का कहना है कि जब आनंद वर्मा साल 2012 में ही इस जमीन को पूरी तरह बेच चुके हैं, तो अब इस पर हक जताने का उनका कोई मतलब ही नहीं बनता। उनके ऊपर लगाए गए तोड़फोड़ और जबरन कब्जे के सभी आरोप पूरी तरह से झूठे और बेबुनियाद हैं।
बाराबंकी से दीपक निर्भय की रिपोर्ट
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