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1 हजार बीघा सरकारी जमीन घोटाला मामले में पूर्व एसडीएम बर्खास्त, 6 अधिकारियों को किया गया गिरफ्तार

 Edited By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Jul 03, 2026 11:41 pm IST,  Updated : Jul 03, 2026 11:42 pm IST

संभल में गंगा नदी के किनारे 1,000 बीघा से ज्यादा सरकारी जमीन का गलत तरीके से बंटवारा किया गया था। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

Sambhal Government Land Fraud- India TV Hindi
संभल में सरकारी जमीन घोटाला Image Source : REPORTER INPUT

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से सरकारी जमीन की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। गंगा नदी के किनारे स्थित 1144 बीघा सरकारी जमीन को गलत तरीके से दूसरों के नाम करने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस धोखेबाजी में शामिल रहने के कारण नौकरी से हटाए गए उस समय के एसडीएम ओमवीर सिंह, सरकारी वकील जय भारद्वाज और पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत समेत छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से जमीन का हिसाब-किताब रखने वाले पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

फर्जी दस्तावेजों से अवैध जमीन किए गए आवंटित

पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरा मामला गुन्नौर तहसील के अंतर्गत आने वाले असदपुर, सुखैला और उसके आसपास के गांवों का है। यहां गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की बहुमूल्य सरकारी भूमि मौजूद थी, जो चकबंदी प्रक्रिया के अधीन थी। भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और अवैध तरीके से पट्टे स्वीकृत करा लिए गए। मामले की भनक लगते ही शिकायतकर्ता लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर 2 जुलाई को गुन्नौर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इस घोटाले में कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

नियमों को ताक पर रख दोबारा बांटी गई जमीन

जांच में एक हैरान करने वाली बात सामने आई कि साल 2018 में भी इसी मामले में जमीन के कागजात को रद्द किया जा चुका था और कई लोगों पर केस भी दर्ज हुआ था। इसके बावजूद, साल 2019 में उस समय के एसडीएम ओमवीर सिंह ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और 162 लोगों के नाम पर दोबारा पट्टे मंजूर कर दिए। जांच कमेटी ने पाया कि इस बार जमीन बांटने में जरूरी नियमों को पूरी तरह से छोड़ दिया गया जैसे न तो ग्राम सभा की कोई खुली बैठक हुई, न ही सबकी सहमति ली गई और न ही लॉटरी निकाली गई। यही नहीं, जमीन के हिस्से और फायदा पाने वाले लोगों की गिनती में भी बहुत बड़ी गड़बड़ी की गई थी।

पुलिस ने अधिकारियों को किया गिरफ्तार

4 जून 2026 को एक खास जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। इस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ना शुरू कर दिया। शुक्रवार को पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें नौकरी से निकाले गए एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व सरकारी वकील जय भारद्वाज, उस समय के चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह और नौकरी से निकाले गए चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि केस में शामिल बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है और कुछ अन्य संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच चल रही है।

संभल से रोहित व्यास की रिपोर्ट

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