Swami Avimukteshwaranand Saraswati Row: यूपी में प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए अपने काफिले के साथ जाने के वक्त उन्हें मेला पुलिस-प्रशासन ने कथित रूप से रोका था, उसी के बाद से विवाद जारी है। और इस बीच, मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दूसरा नोटिस भेजा है। नए नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से पूछा गया है कि क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त करके आपको हमेशा के लिए मेले में प्रवेश से बैन कर दिया जाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर क्या है आरोप?
बता दें कि प्रयागराज मेला प्राधिकरण की तरफ से नोटिस जारी करके कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या पर अपनी बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ रिजर्व पुल संख्या 2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए जा रहे थे। उस वक्त स्नानार्थियों की भीड़ बहुत ज्यादा थी और तब सिर्फ पैदल आवागमन की इजाजत थी।
मेला प्रशासन क्यों हो गया नाराज?
नोटिस के अनुसार, इसकी वजह से मेला पुलिस और मेला प्रशासन को भीड़ मैनेजमेंट में बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के इस तरह एंट्री करने से भगदड़ होने और उससे बड़ी जनहानि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
स्वामी के सामने मेले में एंट्री का सवाल
मेला प्रशासन के नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा गया कि आपके इस कृत्य की वजह से क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके आपको हमेशा के लिए मेले में एंट्री से बैन कर दिया जाए।
मीडिया प्रभारी ने लगाया बदले की भावना का आरोप
इस नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने रिएक्शन देते हुए कहा, 'सरकार अब बदले की भावना से एक्शन कर रही है। शंकराचार्य कैंप पंडाल के पीछे मेला प्रशासन ने यह नोटिस चस्पा किया है।
इससे पहले मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी करके उनसे कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील में आदेश दिया गया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के तौर पर पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता। इसके बावजूद प्रयागराज माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से अपने कैंप पंडाल में लगाए गए बोर्ड पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित व प्रदर्शित किया गया है। इसकी वजह क्या है।
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