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यूपी पुलिस की फैक्ट चेक और मेटा सुसाइडल अलर्ट पहल को सम्मान, जानिए कैसे काम करती हैं दोनों टीम

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Mar 20, 2026 07:03 pm IST,  Updated : Mar 20, 2026 07:45 pm IST

डीजीपी के पीआरओ और सोशल मीडिया सेल के हेड राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि मेटा कंपनी की मदद से सुसाइड रोकने के लिए खास पहल शुरू की गई है। अब जैसे ही कोई फेसबुक या इंस्टाग्राम पर सुसाइड से जुड़े पोस्ट डालता है तो पुलिस को इसकी जानकारी मिलती है और पुलिसकर्मी उसके पास पहुंच जाते हैं।

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फैक्ट चेक और सुसाइड अलर्ट के लिए यूपी पुलिस को सम्मान Image Source : X/@GHAZIABADPOLICE

उत्तर प्रदेश पुलिस को फैक्ट चेक और सुसाइड रोकने से जुड़ी पहल के लिए ईटी अवॉर्ड्स में दो पुरस्कार मिले हैं। डीजीपी के पीआरओ और सोशल मीडिया सेल के हेड राहुल श्रीवास्तव ने दोनों पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को नई दिल्ली के हयात रीजेंसी होटल में आयोजित कार्यक्रम में ये दोनों सम्मान यूपी पुलिस को दिए गए। इन पुरस्कारों का चयन देश के प्रतिष्ठित जूरी सदस्यों ने किया, जिनमें यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व मुख्य सचिव, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के पूर्व सचिव, एनआईसी एवं डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे।

सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुआई में यूपी पुलिस ने ये दोनों पहल शुरू की थीं। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, राजीव कृष्ण के कुशल मार्गदर्शन एवं नवाचारों को प्रोत्साहन देने वाली कार्यशैली के चलते ये दोनों पहलें प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इससे उत्तर प्रदेश पुलिस न केवल आधुनिक और जनोन्मुख पुलिसिंग की दिशा में अग्रसर है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श के रूप में स्थापित हो रही है।

क्या है यूपी पुलिस की फैक्ट चेक पहल

यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेल के हेड राहुल श्रीवास्तव के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक खबरों की जांच और खंडन के लिए अभिनव पहल करते हुए फैक्ट चेक की व्यवस्था शुरू की। वर्ष 2017 में @UPPViralCheck नाम से ट्विटर-एक्स हैंडल लॉन्च किया गया। यह किसी भी राज्य की पुलिस द्वारा संचालित देश का पहला फैक्ट चेक प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य वायरल पोस्ट की सच्चाई जांचकर गलत जानकारी पर तुरंत आधिकारिक स्पष्टीकरण देना है। इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए 4 जुलाई 2022 को @UPPFactCheck के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट भी शुरू किए गए, ताकि सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

मुख्यालय में 24 घंटे काम करती है टीम

समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फैक्ट चेक डेस्क पुलिस मुख्यालय में 24 घंटे काम करती है। यह डेस्क अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल पोस्ट, फोटो और वीडियो की लगातार निगरानी करती है। उत्तर प्रदेश से संबंधित किसी भी संदिग्ध सामग्री को तुरंत सत्यापन के लिए चिन्हित किया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया OSINT टूल्स, रिवर्स इमेज सर्च, जियोलोकेशन एवं मेटाडेटा विश्लेषण के माध्यम से की जाती है, साथ ही जमीनी स्थिति की पुष्टि के लिए संबंधित जिला पुलिस से तत्काल समन्वय किया जाता है। इस कार्य हेतु टीम को विशेषज्ञ फैक्ट चेक संस्थाओं द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है तथा समय-समय पर नवीन तकनीकों का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।

फैक्ट चेक से संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के आंकड़े

ट्विटर पर लगभग 3.71 मिलियन इम्प्रेशन; लगभग 236 फैक्ट चेक एवं खंडन जारी

इंस्टाग्राम शुरुआत से अब तक लगभग 7.85मिलियन व्यूज
फेसबुक पर शुरुआत से अब तक लगभग 54,51,000व्यूज
75 जिलों की पुलिस इकाइयों द्वारा लगभग 4,100 खंडन एवं स्पष्टीकरण जारी किए गए
भ्रामक सूचना फैलाने वालों के विरुद्ध कुल 318 FIR दर्ज (दिसंबर 2017 से फरवरी 2026 तक)

महाकुंभ 2025 के दौरान की गई कार्रवाई

महाकुंभ मेला 2025 के दौरान भगदड़ से संबंधित पुराने वीडियो को महाकुंभ से जोड़कर प्रसारित किया गया, जिससे उत्तर प्रदेश की छवि को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। यूपी पुलिस की फैक्ट चेक टीम की सक्रिय निगरानी के माध्यम से ऐसे 204 अकाउंट चिन्हित किए गए तथा 14 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

फैक्ट चेक से संबंधित उल्लेखनीय प्रकरण

1.दिनांक 03 जनवरी 2020 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा वर्ष 2013 में बांग्लादेश में पुलिस कर्मियों द्वारा की गई मारपीट की एक पुरानी घटना का वीडियो, उत्तर प्रदेश पुलिस से संबंधित बताकर ट्वीट किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से तत्काल खंडन करते हुए वास्तविक तथ्यों से आमजन को अवगत कराया। उत्तर प्रदेश पुलिस की त्वरित एवं तथ्यपरक प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री को अपना उक्त ट्वीट डिलीट करना पड़ा। 

2. दिनांक 08.10.2025 की सायं कमिश्नरेट कानपुर नगर के थाना मूलगंज क्षेत्र में पटाखों के अवैध भंडारण के कारण एक खिलौने की दुकान के सामने विस्फोट की घटना हुई, जिसमें 8 स्थानीय व्यक्ति घायल हो गए। सोशल मीडिया पर फर्जी स्क्रीनशॉट प्रसारित कर यह भ्रामक दावा किया जा रहा था कि इस मामले में एक संगठन से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस द्वारा त्वरित खंडन जारी कर वास्तविक तथ्यों से जनसामान्य को अवगत कराया गया।

3. मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिन्दूर के उपरान्त कतिपय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक एआई वीडियो इस भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा था कि ताजमहल पर पाकिस्तान ने हमला किया है। पुलिस कमिश्नरेट आगरा द्वारा उक्त भ्रामक वीडियो का तत्काल खंडन करते हुए ऐसी भ्रामक पोस्ट करने वालों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करके आवश्यक विधिक कार्रवाई की गई।

4. दिनांक 19.02.2025 को कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा एक भ्रामक वीडियो प्रसारित किया गया, जिसमें पाकिस्तान की एक सड़क दुर्घटना से संबंधित वीडियो को महाकुंभ प्रयागराज का बताकर साझा किया जा रहा था। वीडियो के साथ “माता-पिता की सेवा करके भी उतर जाएगा पाप, यहां पाप धोने के चक्कर में जिंदगी से भी हाथ धो बैठोगे” जैसी भ्रामक टिप्पणी लिखी गई थी तथा बैकग्राउंड में “ये प्रयागराज है” गीत जोड़कर इसे और अधिक भ्रामक बनाने का प्रयास किया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो जनवरी 2025 में पाकिस्तान के करक जनपद में ट्रेलर के ब्रेक फेल होने से हुई सड़क दुर्घटना का है, जिसका महाकुंभ प्रयागराज से कोई संबंध नहीं है। इस भ्रामक पोस्ट का खंडन उत्तर प्रदेश पुलिस के फैक्ट चेक अकाउंट एवं कुंभ मेला अकाउंट के माध्यम से तत्परता से किया गया। साथ ही 26 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई।

क्या है यूपी पुलिस का मेटा सुसाइडल अलर्ट

उत्तर प्रदेश पुलिस के सोशल मीडिया सेन्टर द्वारा यह पहल मेटा कंपनी के सहयोग से विकसित की गई है। इसके अंतर्गत फेसबुक एवं इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट किए जाने की स्थिति में मेटा द्वारा तत्काल पुलिस मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल एवं फोन कॉल के माध्यम से अलर्ट भेजा जाता है। पुलिस मुख्यालय में स्थापित 24×7 समर्पित डेस्क, जो यूपी एसटीएफ सर्वर से एकीकृत है, पीड़ित की लोकेशन का त्वरित पता लगाकर संबंधित जनपद को सूचना प्रेषित करती है। तत्पश्चात स्थानीय पुलिस द्वारा पीड़ित एवं उसके परिजनों से संपर्क कर समय रहते सहायता, रेस्क्यू एवं काउंसलिंग प्रदान की जाती है तथा अपने अधिकार-क्षेत्र में रहते हुए पीड़ित की समस्या के समाधान का भी प्रयास किया जाता है। उल्लेखनीय है कि दिनांक 1 जनवरी 2023 से 28 फरवरी 2026 के बीच मेटा से प्राप्त 2178 अलर्ट के माध्यम से कुल 2181 व्यक्तियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इन बचाए गए 2181लोगों में से 1667 पुरुष एवं 514 महिलाएं शामिल हैं।

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