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उत्तर प्रदेश में होगा 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन, ये क्या काम करेगा, कौन होंगे इसके सदस्य? जानिए

 Reported By: Vishal Pratap Singh, Edited By: Subhash Kumar
 Published : May 18, 2026 11:37 am IST,  Updated : May 18, 2026 12:27 pm IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विकास, सुशासन एवं जनसुविधाओं के विस्तार से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। इनमें से एक फैसला समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का भी है।

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लखनऊ में योगी कैबिनेट की बैठक। Image Source : X (@CMOFFICEUP)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को योगी कैबिनेट की अहम बैठक का आयोजन किया गया है। जानकारी के अनुसार, आज कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव पास हुए हैं। इनमें से सबसे अहम पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा आयोग का गठन के प्रस्ताव को मंजूरी। आइए जानते हैं कि इस आयोग का गठन क्यों किया गया है? इसका काम क्या होगा और इस आयोग के सदस्य कौन होंगे।

क्यों होगा आयोग का गठन?

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में उ0प्र0 राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत निकार्यों में आरक्षण प्रदान करने के आशय से पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों की समकालीन, सतत्, अनुभव जन्य जांच व अध्ययन करने और इस प्रकार निर्धारित अन्य पिछडे वर्ग के व्यक्तियों को निकायवार आनुपातिक आरक्षण दिए जाने हेतु राज्य सरकार द्वारा उ०प्र० राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाना है।प्रदेश में ग्रामीण निकायों में राज्य सरकार द्वारा उ०प्र० पंचायती राज अधिनियम, 1947 एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 के प्राविधानों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों के पर्दा पर आरक्षण का निर्धारण के सम्बन्ध में कार्यवाही की जाती है।

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Image Source : REPORTERसमर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का होगा गठन।

नोटिस में बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद-243-घ तथा तत्क्रम में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क तथा धारा-12 (5) और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-6क, 7क, 18क व 19क में प्राविधानित व्यवस्था के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन हेतु 02 नियमावलियां-उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथासंशोधित) एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथासंशोधित) प्रख्यापित हैं। उक्त दोनों नियमावलियों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों (चेयरपर्सन) एवं स्थानों (सदस्यों) के आरक्षण एवं आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित है। उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क (2) एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा-7क (1) एवं धारा-19क (1) में प्रदत प्राविधानानुसार "राज्य सरकार, आदेश द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों एवं पदों को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करेगी।

कितने आरक्षण का प्रावधान होगा?

यूपी सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिस के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की संख्या का अनुपात कुल पदों की संख्या से यथाशक्य वहीं होगा, जो राज्य की अनुसूचित जातिर्यो की या राज्य की अनुसूचित जनजातिर्यो की या राज्य के पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या से है। पिछड़े वर्गों के लिएआरक्षण त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की कुल संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा एवं यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़ें उपलब्ध न हो तो नियत रीति से सर्वेक्षण करके उनकी जनसंख्या अवधारित की जा सकती है।

कौन होंगे आयोग के सदस्य?

जानकारी के अनुसार, इस आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जायेगी, जो पिछड़े वर्गों से सम्बन्धित मामलों का ज्ञान रखते हों। राज्य सरकार द्वारा इसमें से एक सदस्य मा० उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे जिन्हें आयोग के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जायेगा। इस आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगणों का कार्यकाल सामान्य तौर पर नियुक्ति से 06 माह का होगा।

क्यों अहम है ये फैसला?

माना जा रहा है कि योगी सरकार पंचायत चुनावों में OBC के आरक्षण का नया आधार तैयार करना चाहती है। इसके लिए समर्पित आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी का अध्ययन करेगा जिसके आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा। इसे आगामी पंचायत चुनावों से पहले सरकार का बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम माना जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक याचिका के बाद अदालत ने राज्य सरकार को समय पर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का आदेश दिया था..आज योगी कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है

 

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