आगरा: कहते हैं प्रेम से बड़ा कुछ नहीं होता, और इसका जीता-जागता उदाहरण आगरा में देखने को मिला। ट्रांस यमुना क्षेत्र स्थित शाहदरा बगीची में एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते को इंसानी रिश्तों जैसी गरिमा के साथ अंतिम विदाई देकर पशु प्रेम की भावुक मिसाल पेश की।
यह मामला 14 वर्षों तक परिवार के सदस्य की तरह पाले गए लेब्राडोर डॉग ‘टाइगर’ से जुड़ा है। टाइगर की तबीयत करीब एक माह पहले अचानक खराब हो गई थी। परिजनों ने उसका इलाज कराया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। टाइगर के निधन से पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया।
हिंदू रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार
परिजनों ने टाइगर का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया। उसका अंतिम संस्कार गंगा जी राजघाट पर किया गया। परिवार ने पालतू डॉग के लिए मुंडन संस्कार भी कराया, ठीक उसी तरह जैसे परिवार के किसी सदस्य के लिए किया जाता है। इसके बाद 13 दिन पूरे होने पर आत्मा की शांति के लिए हवन-पूजन और ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। तेरहवीं संस्कार में मोहल्ले के लोग भी शामिल हुए और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
परिवार ने बेटे की तरह पाला
शाहदरा बगीची निवासी घनश्याम दीक्षित ने बताया कि टाइगर को दिल्ली से खरीदा गया था और उसे बेटे की तरह पाला गया। उन्होंने कहा कि टाइगर सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार का अभिन्न हिस्सा था। सुख-दुख के हर पल में वह परिवार के साथ रहा और सभी से गहरा लगाव था।
(रिपोर्ट- अंकुर कुमड़िया)
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