आलू, जो हमारी थाली का प्यारा और बेहद ही जरूरी हिस्सा है, उसकी कहानी बड़ी ही मजेदार है! शायद ये कहानी आपने कभी सुनी नहीं होगी, लेकिन आज हम आपके सामने आलू की पूरी वंशावली की कहानी सुनाने जा रहे हैं। हालांकि ये कहानी हमारी ओर से नहीं बल्कि आलू पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों की तरफ से है। तो बात ऐसी है कि वैज्ञानिकों ने हाल ही में पता लगाया है कि आलू का जन्म कैसे हुआ और सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि जिस आलू को आज हम खाते हैं, उसके "माता-पिता" टमाटर और एक जंगली आलू हैं।

ऐसे पैदा हुआ आलू
लगभग 80 से 90 लाख साल पहले, धरती पर एक ऐसी प्रजाति थी जो ना तो पूरी तरह टमाटर थी और ना ही आलू। इन दोनों का जब मिलन हुआ तो आलू का जन्म हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू का जन्म तब हुआ जब टमाटर के पुरखों ने एक जंगली आलू की प्रजाति, जिसे एट्यूबरोसम कहते हैं, उसके साथ "संभोग" किया। ये एट्यूबरोसम मध्य चिली में पाया जाता था। जब इन दोनों का मेल हुआ, तो उनके जीन मिलकर एक नया पौधा बना, जिसे हम आज आलू कहते हैं।

आलू की मां टमाटर और पिता एट्यूबरोसम
शेन्जेन के कृषि जीनोमिक्स संस्थान के प्रोफेसर सानवेन हुआंग ने इस शोध को लीड किया। उन्होंने बताया कि "टमाटर इसकी माँ है और एट्यूबरोसम पिता!" लेकिन ये पिता, यानी एट्यूबरोसम, आज के आलू से काफी अलग है। ऊपर से देखो तो दोनों थोड़े एक जैसे लगते हैं, लेकिन एट्यूबरोसम के तने पतले होते हैं और उसमें आलू जैसे स्टार्च से भरे कंद नहीं होते।

आलू कैसे बना इतना खास?
जब टमाटर और एट्यूबरोसम का मेल हुआ, तो आलू में कुछ खास गुण आ गए। ये नया आलू कठिन मौसम और मुश्किल हालात में भी उग सकता था। इसके कंद (यानी आलू) में पानी और पोषक तत्व जमा हो सकते थे, जो टमाटर या एट्यूबरोसम में नहीं था। यही वजह है कि आलू दुनिया भर में फैल गया और इतना पॉपुलर हो गया। इतना ही नहीं, आलू इतना अनोखा बन गया कि वो अब अपने "माता-पिता" के साथ दोबारा प्रजनन भी नहीं कर सकता। इस तरह आलू एक बिल्कुल नई प्रजाति बन गया, जिसे वैज्ञानिक पेटोटा कहते हैं।

कैसे पता चला ये सब?
वैज्ञानिकों ने टमाटर और आलू के जीन का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि टमाटर, आलू और एट्यूबरोसम एक ही पौधे के परिवार से हैं, जिसमें बैंगन और तंबाकू भी शामिल हैं। लेकिन टमाटर और आलू के जीन सबसे करीब थे। इस शोध से पता चला कि दो अलग-अलग प्रजातियों के मिलने से कुछ बिल्कुल नया बन सकता है। ये नतीजे 31 जुलाई 2025 को सेल नाम की पत्रिका में छपे।

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