Desi Jugaad Video : कई देशों में इन दिनों LPG और इंडक्शन चूल्हे का संकट देखने को मिल रहा है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे कई देशों की गैस आयात की आपूर्ति होती है। ऐसी खबरों के बीच भारत के लोगों में LPG और इंडक्शन खरीदने को लेकर चिंता साफ दिख रही है। मगर, राजस्थान के एक शख्स ने LPG और इंडक्शन के झंझट को खत्म करते हुए एक ऐसा 'विश्वगुरु चूल्हा' बनाया है जिससे 30 मिनट में 25 लोगों को खाना खिलाया जा सकता है। यह एक 3-इन-1 स्टोव है जो एक साथ उबालने, तलने और पकाने में सक्षम है। अब इसका वीडियो काफी वायरल हो रहा है।
इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा वीडियो
इस वीडियो को@ thebetterindia नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें बताया गया है कि, 'विश्वगुरु चूल्हा' बनाने के पीछे मोहम्मद शेर खान का दिमाग है, जो कक्षा 8 में पढ़ाई छोड़ चुके हैं और राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले एक कुशल लोहार हैं। उन्हें ये चूल्हा बनाने का आइडिया तब आया जब उन्होंने महिलाएं बाटी और दाल जैसे व्यंजन अलग-अलग पकाने में घंटों लगाती थीं, जिससे लकड़ी और ऊर्जा दोनों बर्बाद होती थीं। उनका लक्ष्य खाना पकाने का समय कम करना, लकड़ी की खपत घटाना और धुएं को न्यूनतम करना था।
कैसे काम करता है विश्वगुरु चूल्हा
इंस्टाग्राम पर वायरल एक और वीडियो को @mohammadsher461 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें चूल्हे को इस्तेमान करने के तरीके के बारे में बताया गया है। विश्वगुरु चूल्हा तीन परतों के साथ विशिष्ट रूप से डिजाइन किया गया है, जिससे एक साथ कई व्यंजन पकाए जा सकते हैं। सबसे ऊपरी परत पर रोटी, ब्रेड या पिज्जा पकाया जाता है, मध्य परत पर सब्जियां और मांस तला या ग्रिल किया जाता है, और सबसे निचली परत पर दाल, सूप या करी उबाली जाती है। यह प्रणाली पूरे भोजन को जल्दी और कुशलता से पकाने में सक्षम बनाती है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है। यह चूल्हा ईंधन की अत्यधिक बचत करता है, पारंपरिक चूल्हों में लगने वाली 10 किलोग्राम लकड़ी की तुलना में इसमें केवल 2 किलोग्राम लकड़ी का उपयोग होता है। विशेष व्यवस्थाओं से न्यूनतम धुआं निकलता है। शेर खान का दावा है कि यह चूल्हा पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों से लेकर अंतरराष्ट्रीय ब्रेड और पिज्जा तक, हर तरह का व्यंजन पका सकता है।
विश्वगुरु चूल्हे की कीमत
शेर खान ने 27 वर्षों तक प्रोटोटाइप तैयार किए और उनका परीक्षण घरों और सड़क किनारे के ढाबों में किया। 2017 में, उन्होंने विश्वगुरु चूल्हे का पेटेंट कराया। तब से, भारत भर में 10,000 से अधिक इकाइयां बेची जा चुकी हैं, जिनका उपयोग घरों, ढाबों और छोटे व्यवसायों में किया जा रहा है। तब से लेकर अब तक पूरे भारत में 10,000 से अधिक यूनिट बेची जा चुकी हैं। इस चूल्हे का इस्तेमाल घरों, ढाबों और छोटे व्यवसायों में किया जाता है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसकी कीमत 10,000 रुपये है और यह परिवारों और उद्यमियों दोनों के लिए सुलभ है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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