भारत एक ऐसा देश है जहां ऐसे लोग बहुत कम या फिर शायद ही कोई ऐसा मिलेगा जो यह कह दे कि उसने कभी ट्रेन से सफर नहीं किया है वरना लगभग हर किसी ने कभी न कभी तो वही बहुत सारे लोग अकसर ट्रेन से सफर करते ही रहते हैं। आपने भी ट्रेन से सफर किया ही होगा तो आइए फिर आपको ट्रेन से जुड़ा एक सवाल पूछते हैं। क्या आप यह जानते हैं कि ट्रेन चलाने वाले शख्स को क्या बोला जाता है? जी हां, आपने बिल्कुल सही सोचा, ट्रेन चलाने वाले शख्स को लोको-पायलट कहा जाता है। वैसे आपने यह जवाब तो दे दिया मगर अगले सवाल का जवाब नहीं दे पाएंगे कि ट्रेन चलाने वाले को लोको-पायलट ही क्यों कहा जाता है?
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लोको-पायलट ही क्यों कहा जाता है?
आपने ट्रेन के अलावा बस और कैब में भी सफर किया होगा। कई सारे लोगों को पास खुद की कार भी होगी। अब आप इन सभी वाहनों को चलाने वाले शख्स को ड्राइवर ही तो कहते होंगे। लेकिन ऐसा क्यों है कि ट्रेन चलाने वाले शख्स को हम लोग ड्राइवर नहीं कहते हैं और उन्हें एक अलग नाम दिया गया है। ट्रेन चलाने वाले लोगों को हम सभी लोको-पायलट कहते हैं। आइए आज इसके पीछे का कारण जान ही लेते हैं।
आपको बता दें कि ट्रेन चलाने वाले को लोको-पायलट कहने के पीछे बहुत ही आसान कारण है। दरअसल ट्रेन को चलाने के लिए 'लोकोमोटिव' नामक इंजन लगाए जाते हैं और यहीं से 'लोको' शब्द आया है। वहीं पायलट शब्द उस इंसान के लिए यूज होता है जो भारी मशीनरी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करता और आगे बढ़ाता है। इन्हीं दोनों को मिलाकर शब्द बना 'लोको-पायलट' जो हम ट्रेन चलाने वाले को बोलते हैं। उम्मीद है कि अब तो आप समझ गए होंगे कि लोकोमोटिव इंजन को कंट्रोल करने के कारण ही उन्हें लोको-पायलट कहा जाता है।
नोट: इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है वो अलग-अलग रिपोर्ट्स के आधार पर है और इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है।
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