Railway Interesting Facts: ट्रेन से सफर करना हर किसी को बेहद पसंद होता है खासकर जब लंबे सफर के लिए टिकट बुक की गई हो। ट्रेन के सुहाने सफर के दौरान बच्चों से लेकर बड़े तक सभी कुछ न कुछ ऑब्जर्व जरूर करते हैं। ऐसी अनोखी चीजों को
ऑब्जर्व करने ओर उनकी महत्ता जानने की लोगों के अंदर बड़ी जिज्ञासा होती है। हालांकि, सफर पूरा होने के बाद भी कई बार ट्रेन यात्रा की कुछ चीजें दिमाग में बैठ जाती हैं और काफी देर तक उनकी याद दिलाती हैं। जैसे— ट्रेन का हॉर्न, ट्रेन की गति का एहसास और रेलवे स्टेशन की अनाउंसमेंट। इनमें से तीनों चीजों के अपने—अपने अनोखे और अजब—गजब फैक्ट हैं। हालांकि, अगर अकेले ट्रेन के हॉर्न की ही बात करें तो इसके भी रोचक तथ्य वायरल होते रहते हैं। स्टेशन के पास रहने वालों ने गौर किया होगा कि कई बार सुबह 3 बजे भी ट्रेन के हॉर्न की आवाज आती है। आखिर सुबह 3 बजे ही ट्रेन का हॉर्न क्यों बजाया जाता है ? आज हम आपको इसके बारे में बताने वाले हैं।
ट्रेन के हॉर्न के प्रकार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन के हॉर्न कई प्रकार के होते हैं। ये अलग-अलग स्थितियों को दर्शाते हैंं। जैसे— एक लंबा हॉर्न (यात्रियों को रुकने का संकेत), दो छोटे हॉर्न (यात्रा शुरू करने की तैयारी), चार छोटे हॉर्न (तकनीकी खराबी), छह छोटे हॉर्न (आपात स्थिति), और एक लंबा-एक छोटा हॉर्न (ब्रेक सिस्टम सेट करने का संकेत)। गौरतलब है कि, भारतीय रेलवे में मुख्य रूप से 11 तरह के हॉर्न होते हैं, जिनमें एक लंबा और दो छोटे (चेन पुलिंग/गार्ड ब्रेक), दो लंबे और दो छोटे (इंजन कंट्रोल), और दो बार रुककर हॉर्न (रेलवे क्रॉसिंग) जैसे सिग्नल शामिल हैं, जो चालक और गार्ड के बीच संचार का काम करते हैं।
धुलाई के लिए भी बजता है हॉर्न
आपको बता दें कि, ट्रेन का लोको पायलट ट्रेन के यार्ड में धुलाई के लिए जाने को लेकर भी एक हॉर्न बजाता है। जब ट्रेन को सफाई की जरूरत पड़ती है, तब लोको पायलट स्टेशन पर छोटा हॉर्न देता है। इससे बाहर के लोगों को अंदेशा हो जाता है कि, ट्रेन यार्ड में धुलाई और सफाई के लिए जाने को तैयार है।

सुबह 3 बजे ही हॉर्न क्यों बजता है
रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि, ट्रेन का हॉर्न सुबह 3 बजे अक्सर सुरक्षा कारणों से, जैसे पटरियों पर मौजूद जानवरों या लोगों को चेतावनी देने, लेवल क्रॉसिंग पार करते समय सतर्क करने, या स्टेशन से निकलते समय सिग्नल देने के लिए बजाया जाता है। चूंकि रात के समय और सुबह जल्दी लोग या जानवर अनजान होकर पटरियों के पास हो सकते हैं और हॉर्न उन्हें सुरक्षित दूरी बनाए रखने का संकेत देता है। खासकर जब लोको पायलट को नियंत्रण बनाए रखने या किसी खास स्थिति (जैसे इमरजेंसी) का संकेत देना हो तो सुबह हॉर्न बजाना आवश्यक हो जाता है।
ऐसे समझें हॉर्न बजाने के मुख्य कारण
- रात या सुबह के समय, लोग और जानवर (हाथी, मवेशी आदि) अक्सर पटरियों के पास होते हैं। हॉर्न उन्हें ट्रेन आने की चेतावनी देता है, ताकि वे हट जाएं और दुर्घटना टल सके।
- बिना फाटक वाली क्रॉसिंग या उन फाटकों पर जहां फाटक नहीं होते, हॉर्न बजाना कानूनी रूप से अनिवार्य है ताकि राहगीरों को सतर्क किया जा सके।
- लोको पायलट और गार्ड के बीच संचार के लिए भी हॉर्न का इस्तेमाल होता है। यूं समझ लें कि, तीन छोटे हॉर्न आपातकाल का संकेत देते हैं, जबकि अन्य पैटर्न (एक लंबा, एक छोटा) ब्रेक चेक या ट्रेन शुरू करने के लिए होते हैं। जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया।
- स्टेशन से निकलने से पहले गार्ड को सिग्नल देने के लिए भी हॉर्न बजाया जाता है।

बहरहाल आप यूं समझ लें कि 3 बजे हॉर्न बजना किसी विशेष नियम से ज्यादा, रेलवे सुरक्षा के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, जो उस समय की परिस्थितियों (कम दृश्यता, लोगों की मौजूदगी) के कारण जरूरी हो जाती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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