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ममता बनर्जी के कोर्ट में वकीलों की तरह गाउन पहनने पर गहराया विवाद, बार काउंसिल ने मांगा जवाब; पूछे ये सवाल

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : May 15, 2026 02:56 pm IST,  Updated : May 15, 2026 02:57 pm IST

Mamata Banerjee के वकीलों की यूनिफॉर्म पहनकर हाईकोर्ट में पेश होने को लेकर विवाद बढ़ गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ममता के ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ और वकालत की वैधता के बारे में पश्चिम बंगाल की बार काउंसिल से जवाब मांगा है।

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ममता बनर्जी के वकीलों की तरह गाउन और बैंड पहनने पर विवाद बढ़ा। Image Source : PTI

Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकीलों की तरह गाउन और बैंड पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश होने पर विवाद गहराता जा रहा है। वकीलों की सर्वोच्च नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से इस बारे में जवाब मांगा है। BCI ने ममता के बतौर वकील नामांकन और प्रैक्टिस की स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा है।

बंगाल की बार काउंसिल से पूछे गए ये सवाल

BCI ने जिन सवालों का जवाब मांगा है, उसमें पूछा गया है कि 

  1. ममता बनर्जी का एनरोलमेंट नंबर और उसकी तारीख क्या है?
  2. क्या उनका नाम अभी वकीलों के रजिस्टर में दर्ज है?
  3. मुख्यमंत्री के तौर पर उनके 2011 से 2026 तक के कार्यकाल के दौरान क्या उन्होंने अपनी प्रैक्टिस स्वेच्छा से निलंबित की थी?
  4. क्या उन्होंने प्रैक्टिस दोबारा शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया है?
  5. क्या उनका 'सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस' (COP) वर्तमान में वैध और सक्रिय है?

रिकॉर्ड से छेड़छाड़ को लेकर दी कड़ी चेतावनी

जान लें कि BCI ने बंगाल की बार काउंसिल को 16 मई तक जवाब देने को कहा है। साथ ही, सख्त चेतावनी दी है कि राज्य बार काउंसिल अपने रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ ना करे। मामले के सभी मूल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए। जांच लंबित रहने तक दस्तावेजों में किसी भी तरह का सुधार, ओवरराइटिंग या बदलाव न किया जाए।

कोर्ट में प्रैक्टिस को लेकर क्या है नियम?

दरअसल, विवाद इस बात को लेकर था कि एलएलबी परीक्षा पास करने का मतलब कोर्ट में सीधे पेश होने का अधिकार नहीं होता। उसके लिए राज्य बार काउंसिल के पास एनरोलमेंट करवाना होता है और सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस हासिल करना होता है। अगर ममता पहले बतौर वकील बार काउंसिल के रजिस्टर में दर्ज रही भी हों, तो संवैधानिक पद पर रहने के चलते उनका नामांकन स्थगित हो जाना चाहिए था।

पद को छोड़ने के बाद वकालत दोबारा शुरू करने के लिए उन्हें राज्य बार काउंसिल को आवेदन देना होता है और प्रैक्टिस की अनुमति हासिल करनी होती है। इसलिए बार काउंसिल और इंडिया ने इसके लिए जवाब मांगा है।

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