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RG कर रेप-मर्डर मामले में तीन पुलिस अधिकारी सस्पेंड, सीएम शुभेंदु ने विभागीय जांच के दिए आदेश

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 15, 2026 04:58 pm IST,  Updated : May 15, 2026 05:11 pm IST

पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को RG Kar रेप-मर्डर केस की जांच में कथित लापरवाही के आरोप में तीन पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी- India TV Hindi
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी Image Source : ANI

हावड़ा: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि RG Kar डॉक्टर रेप और मर्डर केस को ठीक से न संभालने के आरोप में तीन आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, उस समय के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है।

प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि RG कर घटना के संबंध में हमने खास तौर पर कोलकाता के पूर्व CP विनीत कुमार गोयल और अन्य अधिकारियों जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इन पर मामले को ठीक से न संभालने के भी आरोप हैं। 

पुलिस अधिकारियों पर है ये आरोप

इसके अलावा यह भी आरोप है कि दो अधिकारियों ने मृतका के परिवार को पैसे देने की कोशिश की। उस समय इस मामले से जुड़े सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, क्योंकि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है।  

क्या है पूरा मामला

यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई थी। कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की एक जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल की बिल्डिंग में बने एक सेमिनार हॉल के अंदर मिला था। कोलकाता पुलिस ने 33 साल के एक सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को डॉक्टर के साथ रेप और उसकी हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया था। बाद में इस केस को CBI को सौंप दिया गया था। इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ित को इंसाफ दिलाने की मांग की गई। पीड़ित की मां ने बाद में हाल ही में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में पानीहाटी सीट से BJP के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ​​विधानसभा चुनावों से पहले BJP के मुख्य चुनावी वादों में से एक RG Kar पीड़ित को इंसाफ दिलाना भी शामिल था।

20 जनवरी, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने रॉय को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई। हालांकि, डॉक्टर के परिवार का आरोप है कि इस अपराध को अंजाम देने में संजय रॉय अकेला शामिल नहीं था। इस साल अप्रैल में पीड़ित परिवार ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने इस मामले से जुड़े कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई है, जिनकी CBI और राज्य पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की है। उन्होंने कहा कि एक फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय के मुताबिक, घटना के समय वहां एक से ज़्यादा लोग मौजूद हो सकते हैं।

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