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पश्चिम बंगाल में SIR शुरू होते ही मचा बवाल, बीजेपी बीएलए को पहनाई जूतों की माला; सामने आया वीडियो

 Reported By: Onkar Sarkar Edited By: Mangal Yadav
 Published : Nov 06, 2025 10:28 pm IST,  Updated : Nov 06, 2025 10:41 pm IST

बंगाल में एसआईआर का काम कर रहे बीजेपी के एक बीएलओ के साथ बदसलूकी की गई। बीजेपी ने मामले की शिकायत की है।

बीजेपी बीएलए को पहनाई जूतों की माला- India TV Hindi
बीजेपी बीएलए को पहनाई जूतों की माला Image Source : REPORTER

कुचबिहार:पश्चिम बंगाल में एसआईआर शुरू होने बाद बवाल मच गया है। आरोप है कि भाजपा बीएलए (Booth Lavel Agent) को जूतों की माला पहनाई गई। बीजेपी का आरोप है कि कुचबिहार जिले के माथाभांगा-1 ब्लॉक के पचागढ़ ग्राम पंचायत के छत खाट बारी इलाके में भाजपा बीएलए-2 निवास दास के गले में जूतों की माला डाल दी गई। 

बीजेपी ने दर्ज कराई शिकायत

इस घटना को लेकर भाजपा ने उप-विभागीय मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाया है। निवास दास जूतों की माला लेकर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कार्यालय गए। भाजपा ने बताया है कि उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को एक लिखित शिकायत सौंपी गई है। बीजेपी ने कहा है कि अगर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

टीएमसी कार्यकर्ता पर आरोप

आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कार्यकर्ता को जूतों की माला पहनाने के लिए मजबूर किया। निबास दास ने आरोप लगाया कि जब वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम कर रहे एक बीएलओ से मिलने गए थे, तभी उन पर हमला किया गया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक स्थानीय टीएमसी नेता ने मुझे थप्पड़ मारने लगा। बीजेपी ने चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

टीएमसी ने आरोपों से किया इनकार

 हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों से इनकार किया है। स्थानीय तृणमूल नेता उकील बर्मन ने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। तृणमूल का कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल नहीं है। यह हमारे खिलाफ एक साजिश है। भाजपा कार्यकर्ता ने सिर्फ़ प्रचार पाने के लिए ऐसा किया है। 

 बीएलओ से पूछे जा रहे हैं सवाल

 
बीएलओ मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवाने के लिए घर-घर जा रहे हैं लेकिन ‘‘उन्हें कब घर आएंगे, विदेश में रहने वाले लोगों की गणना कैसे की जा सकती है, 2002 के बाद पैदा हुए लोगों का क्या होगा’’ जैसे जटिल सवालों का सामना करना पड़ रहा है। निर्वाचन आयोग ने बीएलओ को अपने निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान की जांच का जिम्मा सौंपा है, जो 2002 की मतदाता सूची पर आधारित होगा, जब राज्य में अंतिम मतदाता सूचियों का एसआईआर किया गया था। 

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