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बंगालः पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी 3 साल बाद जेल से रिहा, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में मिली थी जमानत

 Reported By: Onkar Sarkar Edited By: Mangal Yadav
 Published : Nov 11, 2025 03:41 pm IST,  Updated : Nov 11, 2025 04:02 pm IST

पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी तीन साल तीन महीने बाद रिहा हो गए हैं। स्कूल शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार मामले में आठ गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी - India TV Hindi
पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी। फाइल Image Source : PTI

कोलकाताः कथित शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी और पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को मंगलवार को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। चटर्जी 23 जुलाई, 2022 से न्यायिक हिरासत में थे, जब ईडी ने उन्हें इस घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। पार्थ चटर्जी को शारीरिक अस्वस्थता के कारण दक्षिण कोलकाता के मुकुंदपुर आरएन टैगोर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ज़मानत मिलने के बाद मंगलवार दोपहर उन्हें वहीं से रिहा कर दिया गया।

ईडी और सीबीआई दोनों मामलों में मिली जमानत

पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता के समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हो गए और "पार्थ दा ज़िंदाबाद" के नारे लगाते हुए दक्षिण कोलकाता स्थित उनके नकटला स्थित आवास के लिए रवाना हुए। सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे संबंधित मामलों में एक निचली अदालत के समक्ष गवाहों की जांच पूरी होने के बाद उनकी रिहाई हुई। इससे पहले चटर्जी को ईडी के मामलों में ज़मानत मिल गई थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें संबंधित सीबीआई मामलों में इस शर्त पर ज़मानत दी थी कि गवाहों की जांच पूरी होने तक वह हिरासत में रहेंगे। 

शिक्षक भर्ती में लगा था घोटाले का आऱोप

टीएमसी के वरिष्ठ नेता और 2001 से विधायक चटर्जी ने 2011 से 2022 तक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया और 2016 से शिक्षा विभाग संभाला। उन पर राज्य शिक्षा विभाग में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों, सहायक शिक्षकों और ग्रुप डी कर्मचारियों जैसे पदों पर अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्ति का आरोप लगाया गया है। 

पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के असफल उम्मीदवारों द्वारा व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद यह विवाद सामने आया। याचिका पर कार्रवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने 8 जून, 2022 को सीबीआई जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने अगले दिन एक प्राथमिकी दर्ज की, जबकि ईडी ने 24 जून, 2022 को कई राज्य शिक्षा अधिकारियों के नाम पर मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया।  

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