पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए दो चरणों में चुनाव होने हैं, जिसमें से पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को है। मेदिनीपुर लोकसभा सीट के तहत आने वाली खड़गपुर सदर की विधानसभा सीट पर भी पहले ही चरण में वोट डाले जाने हैं। दोनों फेज में वोटिंग के बाद चार मई को वोटों की गिनती होगी। खड़गपुर सदर विधानसभा सीट अनारक्षित यानी जनरल कैटगरी की सीट है। यह एक हाई प्रोफाइल सीट है क्योंकि यहां से प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष फिर से चुनावी ताल ठोक रहे हैं और उनके खिलाफ चुनावी मैदान में टीएमसी ने अपने दिग्गज नेता प्रदीप सरकार को उतारा है। जबकि इस सीट से सीपीएम ने मधुसूदन रॉय को टिकट दिया है।
खड़गपुर सदर सीट से साल 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के दिलीप घोष ने जीत दर्ज की थी। बाद में वह 2019 के लोकसभा चुनावों में मेदिनीपुर संसदीय सीट से लोकसभा सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें बर्धवान-दुर्गापुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। भाजपा ने दिलीप घोष को फिर से खड़गपुर सदर सीट से विधानसभा चुनाव के लिए सियासी मैदान में उतारा है।
दिलीप घोष या प्रदीप सरकार, किसे मिलेगी जीत
इस सीट से अबतक हुए कुल 17 बार के चुनावों, जिसमें 2019 का उप चुनाव भी शामिल है। इस सीट पर भाजपा ने सिर्फ दो बार, जबकि राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने सिर्फ एक बार यहां जीत दर्ज की है। साल 2019 में सांसद बनने पर दिलीप घोष के इस्तीफे के बाद हुए उप चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार की जीत हुई थी। इस बार भी तृणमूल ने प्रदीप सरकार पर फिर से भरोसा जताया है। बता दें कि पिछले 17 बार के चुनावों में सबसे ज्यादा 10 बार, साल 1969, 1971, 1972, 1982, 1987, 1991, 1996, 2001, 2006 और 2011 में इस सीट से कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।