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माता-पिता, बहन और दादी के हत्यारे को मिली सजा-ए-मौत, आसिफ ने क्यों दिया था इस खौफनाक वारदात को अंजाम?

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 18, 2025 07:06 am IST,  Updated : May 18, 2025 07:15 am IST

मालदा की एक अदालत ने एक शख्स को परिवार के सदस्यों की हत्या करने के दोषी पाए जाने पर मौत की सजा सुनाई। शख्स ने अपने माता-पिता, बहन और दादी की गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : REPRESENTATIVE IMAGE

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की एक अदालत ने शनिवार को एक सनसनीखेज हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए एक शख्स को मौत की सजा सुनाई। शख्स को अपने ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई। जिला सत्र न्यायाधीश सुभायु बनर्जी ने मोहम्मद आसिफ को अपने माता-पिता, बहन और दादी की निर्मम हत्या करने का दोषी पाया, जिसके बाद उसे मौत की सजा देने का फैसला लिया गया।

परिवार के सदस्यों की गला घोंट की हत्या

यह जघन्य अपराध 28 फरवरी, 2021 को कालियाचक थाना क्षेत्र के 16 माइल इलाके में हुआ था। जांच में सामने आया कि संपत्ति विवाद के चलते आसिफ ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह साबित हुआ कि मोहम्मद आसिफ ने अपने पिता जावेद अली (53), मां इरा बीबी (36), बहन रीमा खातून (16) और दादी नूर बेओवा (72) को पहले बेहोश किया और फिर एक-एक करके उनका गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

4 लोगों को आजीवन कारावास की सजा

एक अन्य खबर में राजस्थान के कोटा की एक अदालत ने 2018 में 16 वर्षीय लड़के का किडनैड करने के बाद उसकी हत्या के मामले में दो भाइयों समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर 13,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल, निजाम उर्फ ​​निजामुद्दीन (43) को उनकी बेटी की शाकिब (16) से दोस्ती पंसद नहीं था। शाकिब निजाम की बेटी के साथ कोचिंग सेंटर में पढ़ता था। निजाम, उसके भाई सिराज (35) और दो अन्य व्यक्तियों लोकेंद्र सिंह (26) व आदिल (24) ने एक जुलाई 2018 को डीसीएम सर्कल से शाकिब का अपहरण कर लिया। 

चारों शाकिब को उद्योग नगर थाना क्षेत्र में एक सुनसान जगह पर ले गए और लोहे की रॉड व डंडों से बेरहमी से पीटा। एक सप्ताह बाद इलाज के दौरान शाकिब की मौत हो गई। अदालत ने चारों लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 364 (अपहरण) और 302 (हत्या) के तहत दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 13,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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