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'मैंने यहां कोई रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं देखा', गुलशन कॉलोनी पर TMC और BJP आमने-सामने

 Published : Nov 20, 2025 07:38 am IST,  Updated : Nov 20, 2025 07:38 am IST

कोलकाता की गुलशन कॉलोनी में आबादी और वोटरों की संख्या में भारी अंतर को लेकर TMC और BJP आमने-सामने हैं। TMC का कहना है कि यहां सभी भारतीय हैं और वोट ट्रांसफर की प्रक्रिया जारी है, जबकि BJP फर्जी पहचान और अनियमितताओं के आरोप लगा रही है।

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TMC के हेल्प डेस्क प्रभारी मेहराबुद्दीन खान। Image Source : ANI

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी कि SIR अभियान के तहत बुधवार को कोलकाता के मुस्लिम बहुल इलाके गुलशन कॉलोनी में घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच शुरू कर दी गई है। इस कॉलोनी में करीब 1 से 1.5 लाख लोग रहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ 2500 से 3000 मतदाता ही दर्ज हैं। इस बड़े अंतर को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

'गुलशन कॉलोनी में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं'

TMC के हेल्प डेस्क प्रभारी मेहराबुद्दीन खान ने कहा, 'गुलशन कॉलोनी की आबादी करीब 1 से 1.5 लाख है। वोटरों की संख्या 2500-3000 के आसपास है। बाकी लोग वोट बनवाने की प्रक्रिया में हैं या अपना वोट यहां ट्रांसफर करवा रहे हैं। यह कॉलोनी 20-25 साल पुरानी है। आबादी अचानक नहीं बढ़ी, धीरे-धीरे बढ़ी है। कहीं से अचानक लोगों का आना नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से लोग यहां आए हैं। यहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं। विपक्ष कई तरह के आरोप लगा सकता है, लेकिन यहां सभी भारतीय हैं। कोई बिहार से आया, कोई उत्तर प्रदेश से, कोई दूसरी जगहों से। मैंने यहां कोई रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं देखा।'

'गरीब तबके के लोग यहां सस्ते मकान के कारण बसते हैं'

मेहराबुद्दीन खान ने कहा, 'फिर भी जांच हो सकती है, कोई भी फैसला नहीं सुना सकता। गरीब तबके के लोग यहां सस्ते मकान के कारण बसते हैं। एक ब्लॉक में 1622 वोटरों में से 1200 को फॉर्म बांट दिए गए हैं, बाकी लोगों को उनके पुराने बूथ पर भेजा जा रहा है।' वहीं, BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या गुलशन कॉलोनी में कोई भारतीय रहता भी है? अगर भारतीय हैं तो वोटर लिस्ट में उनका नाम क्यों नहीं है? अगर नकली पहचान पत्र बन गया तो क्या कोई भारतीय हो जाता है? गुलशन कॉलोनी बनी कैसे? वहां बिजली किसने दी? पानी किसने दिया?'

'बहुत सारे लोग दूसरी विधानसभा क्षेत्रों से आए हैं'

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) वसीम अकरम ने बताया, 'मेरे ब्लॉक में फॉर्म बांटने का काम लगभग पूरा हो चुका है। कुल 1622 वोटर हैं, सिर्फ 300 के करीब फॉर्म बाकी हैं। कुछ लोग यहां रहते हैं लेकिन उनका वोट कहीं और दर्ज है। वे खुद आकर फॉर्म ले गए। 5-6 फीसदी लोग कह रहे हैं कि उनका नाम लिस्ट में होना चाहिए था, लेकिन नहीं है। 1995 में जिनका वोट बना था, 2002 के SIR में उनका नाम काट दिया गया था। ऐसे लोगों को दिक्कत हो रही है, उनके कागजात चेक किए जा रहे हैं। बहुत सारे लोग दूसरी विधानसभा क्षेत्रों से आए हैं और अभी तक वोट ट्रांसफर नहीं करवाया। ऐसे लोग 50 फीसदी से ज्यादा हैं।'

पूरे पश्चिम बंगाल में 659 हेल्प डेस्क बनाए गए

कॉलोनी के रहने वाले मोहम्मद अनवर ने बताया, 'मैं 2015 से गुलशन कॉलोनी में रह रहा हूं। मैंने अपना वोटर कार्ड ओडिशा से यहां ट्रांसफर करवाया था। मुझे ठीक याद नहीं कब करवाया, लेकिन यहां काउंसिल चुनाव में वोट डाला है। 2002 में मेरा नाम यहां दर्ज नहीं था। मैं असम का रहने वाला हूं। पहले ओडिशा में काम करता था, वहां अपना मकान नहीं था। बेटी यहां रहती थी। जब ये इमारतें बन रही थीं, बेटी के साथ मिलकर यहां मकान खरीदा।'बता दें कि राज्य में 294 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए 80 हजार से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारी 4 दिसंबर तक घर-घर जाएंगे। लोगों की मदद के लिए पूरे राज्य में 659 हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। (ANI)

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