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बंगाल चुनावः जंगीपुर में 64 साल से आखिर क्यों नहीं जीत पाया कोई हिंदू उम्मीदवार? जानिए क्या रहा है चुनावी इतिहास

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav Published : Mar 06, 2026 08:02 pm IST, Updated : Mar 06, 2026 08:03 pm IST

Jangipur Assembly Elections 2026: जंगीपुर में कांग्रेस पहले बहुत मजबूत हुआ करती थी लेकिन समय के साथ मतदाताओं का रुझान टीएमसी की तरफ बढ़ गया। बीजेपी के मजबूत होने से टीएमसी को इस सीट पर कड़ी टक्कर मिल रही है।

जंगीपुर विधानसभा चुनाव 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV जंगीपुर विधानसभा चुनाव 2026

West Bengal Assembly Elections 2026: जंगीपुर पश्चिम बंगाल का एक अहम विधानसभा क्षेत्र है, जो मुर्शिदाबाद ज़िले में है। जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट जनरल कैटेगरी की है। 2021 के विधानसभा चुनावों में यह सीट टीएमसी ने जीती थी। यहां पर बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी प्रमुख पार्टियां हैं और तीनों के बीच ही चुनावी मुकाबला देखने को मिल सकता है। 

जंगीपुर के बारे में जानें

जंगीपुर एक सबडिवीजन-लेवल का शहर है। यह इलाका यह भागीरथी नदी के किनारे बसा है। इस इलाके में दो बड़े थर्मल पावर प्लांट भी हैं। दोनों ही राज्य के एनर्जी ग्रिड में अहम योगदान देते हैं। बीड़ी इंडस्ट्री, छोटे लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग और बॉर्डर पार व्यापार जंगीपुर की इकॉनमी का सहारा हैं। जंगीपुर शहर में बेसिक सुविधाएं तो हैं, लेकिन रघुनाथगंज और सुती ब्लॉक के कई गांवों में रोड कनेक्टिविटी खराब है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी यह इलाका पिछड़ा हुआ है। गर्मियों में पानी की किल्लत भी लोगों की समस्याएं बढ़ाती हैं। 

इस साल एसआईआर से पहले जंगीपुर में 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम वोटर थे। 20 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के मतदाता थे। यहां पर 50 प्रतिशत से ज्यादा वोटर गांवों में रहते हैं जबकि करीब 44 प्रतिशत मतदाता शहरों में रहते हैं। 

जंगीपुर सीट का चुनावी इतिहास

1957 में बनी जंगीपुर सीट पर अब तक 16 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से कांग्रेस 8 बार और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी चार बार जीती है। टीएमसी यहां पर दो बार जीत दर्ज करने में सफल रही है। दो बार यहां पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली है। 1957 और 1962 के चुनावों में हिंदू नेताओं ने यह सीट जीती थी, लेकिन तब से यहां कोई भी गैर-मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सका है। 2011 के बाद से इस सीट पर राजनीतिक झुकाव में बदलाव देखा गया है। 

2011 में कांग्रेस नेता मोहम्मद सोहराब ने 68,699 वोटों के साथ जीत हासिल की थी। 2016 में पहली बार यहां पर टीएमसी ने जीत दर्ज की थी। 2021 में भी टीएमसी यहां से जीत दर्ज करने में सफल रही। 2001 और 2006 में यह सीट रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी। टीएमसी यहां पर इस जीत की हैट्रिक लगाना चाहेगी जबकि बीजेपी पहली बार जीत तलाशने की कोशिश करेगी। 

 

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