
धांजा ने कहा कि उनकी मुख्य चिंता यह है कि केवल 20 प्रतिशत मामलों में एक ही दावा किया जाता है कि धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक है और इसे अपहरण के बाद लड़की पर थोपा नहीं गया है। इस हफ्ते के शुरूआत में इस मुद्दे पर एक मसौदा विधेयक को सिंध विधानसभा के उपाध्यक्ष को विचार के लिए सौंपा गया है।