ढाका: बांग्लादेश की संसद में 1971 के मुक्ति संग्राम को लेकर किया गया एक सांसद का दावा विवादों में आ गया है। जमात-ए-इस्लामी के सांसद अब्दुल मुंतकिम को अपने बयान पर माफी मांगनी पड़ी है। उन्होंने संसद में कहा था कि उनके पिता और दादा 1971 के मुक्ति संग्राम में शहीद हो गए थे, लेकिन बाद में मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि उनके पिता जीवित हैं। इतना ही नहीं, सांसद का जन्म भी बांग्लादेश की आजादी के करीब 10 साल बाद 1981 में हुआ था।
'परिवार के 47 सदस्य थे स्वतंत्रता सेनानी'
दरअसल, 14 जून को बजट पर चर्चा के दौरान संसद में बोलते हुए हाफिज अब्दुल मुंतकिम ने कहा था कि उनके परिवार ने 1971 के मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके पिता और दादा दोनों जंग में शहीद हुए थे। साथ ही उन्होंने कहा था कि उनके परिवार के 47 सदस्य स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनमें 11 दादा शामिल थे। उन्होंने अपनी मां को भी मुक्ति संग्राम की एक संगठक बताया था।
तस्वीरों में पिता के साथ नजर आए थे सांसद
हालांकि, उनके इस दावे के बाद मीडिया ने मामले की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि चुनाव आयोग को दिए गए उनके आधिकारिक हलफनामे के अनुसार उनका जन्म 10 जनवरी 1981 को हुआ था। यानी उनका जन्म बांग्लादेश की आजादी के लगभग 10 साल बाद हुआ था। इसके अलावा कुछ अखबारों ने हाल की ऐसी तस्वीरें भी प्रकाशित कीं, जिनमें मुंतकिम अपने पिता के साथ नजर आए। जबकि सांसद ने कहा था कि यही पिता 1971 की जंग में शहीद हो चुके थे।
सच सामने आने के बाद सांसद ने मांगी माफी
मामला सामने आने के बाद सांसद को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने बांग्लादेश के अखबार इत्तेफाक से बातचीत में कहा कि संसद में भाषण के दौरान उन्हें तेज सिरदर्द था, जिसके कारण उनसे गलती हो गई। उन्होंने देशवासियों से माफी मांगते हुए कहा, 'वास्तव में मेरे पिता जीवित हैं।' मुंतकिम ने यह भी माना कि संसद में दिया गया उनका बयान पूरी तरह सही नहीं था। उन्होंने संसद अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद को पत्र लिखकर अपने भाषण के रिकॉर्ड में सुधार करने का अनुरोध किया है।
जमात-ए-इस्लामी ने किया था आजादी का विरोध
बता दें कि जमात-ए-इस्लामी ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया था। ऐसे में मुक्ति संग्राम में अपने परिवार की भूमिका को लेकर किए गए दावे पर विवाद और भी बढ़ गया है। इससे पहले जमात प्रमुख और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने भी संसद में खुद को शहीद परिवार का सदस्य बताया था। उनके इस बयान पर भी संसद में तीखी बहस हुई थी।
BNP सांसद फजलुर ने दावों पर उठाए सवाल
सत्तारूढ़ बीएनपी के सांसद और 1971 युद्ध के पूर्व सेनानी फजलुर रहमान ने तब कहा था कि जो लोग बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध करने वाली पार्टी से जुड़े हैं, उनका खुद को शहीद परिवार बताना कई सवाल खड़े करता है। अब अब्दुल मुंतकिम के बयान और बाद में मांगी गई माफी ने बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
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