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Pakistan Floods: 'दानव मॉनसून' ने उड़ाए पाकिस्तान के होश, हुआ इतना बर्बाद कि उबरने की उम्मीद नहीं, आखिर किस वजह से खुद चलकर आई तबाही

Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant Published : Sep 07, 2022 05:21 pm IST, Updated : Sep 07, 2022 05:21 pm IST

Pakistan Floods: पाकिस्तान में मॉनसून के कारण आई बाढ़ को दानव मॉनसून करार दिया गया है। इससे पता चलता है कि बारिश के कारण वहां किस हद तक तबाही हुई। बीते दो महीने के दौरान आई इस आपदा से पहले देश को मार्च और अप्रैल के महीने में प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ा था।

Pakistan Floods- India TV Hindi
Image Source : AP Pakistan Floods

Highlights

  • 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था
  • 1,985 लोगों की जान चली गई थी
  • जून के मध्य से अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है

Pakistan Floods: पाकिस्तान में मॉनसून के कारण आई बाढ़ को दानव मॉनसून करार दिया गया है। इससे पता चलता है कि बारिश के कारण वहां किस हद तक तबाही हुई। बीते दो महीने के दौरान आई इस आपदा से पहले देश को मार्च और अप्रैल के महीने में प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ा था। इस गर्मी के कारण पाकिस्तान के उत्तर में स्थित ग्लेशियरों के पिघलने की गति में वृद्धि हुई और जुलाई अगस्त के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अप्रत्याशित बारिश हुई। मानव जनित कारणों से जलवायु में हुए परिवर्तन की वजह से मौसम में इस तरह का बदलाव देखने को मिला। इस साल की गर्मी ने पिछले सौ वर्षों का कीर्तिमान ध्वस्त कर दिया और दक्षिण पूर्वी सिंध प्रांत में औसत से नौ गुना ज्यादा बारिश हुई।

जलवायु परिवर्तन की पड़ी मार 

जून के मध्य से अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और बाढ़ के कारण तीन करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। वर्ष 2019 में पाकिस्तान द्वारा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की दर 43 करोड़ 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड प्रति वर्ष थी जो कि वैश्विक उत्सर्जन का 0.9 प्रतिशत था।पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों का बेहद कम उत्सर्जन करता है लेकिन जलवायु परिवर्तन की मार उस पर सबसे ज्यादा पड़ी। इसलिए पाकिस्तान को इस आपदा से उबारने का जिम्मा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का है।

2010 में भी बाढ़ ने मचाई थी तबाही 
आपको बता दें कि उत्तरी अमेरिका में बाढ़ के आर्थिक प्रभावों का अध्ययन और सिंधु नदी बेसिन में जल प्रबंधन के इतिहास बताता है कि वर्तमान में जो 10 अरब डॉलर की क्षति बताई जा रही है वो इस विभीषिका से हुए नुकसान की वास्तविकता से कोसों दूर है। पाकिस्तान में 2010 में भी बाढ़ आई थी जिसके कारण 1,985 लोगों की जान चली गई थी और 10 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था। बार-बार होने वाली इन घटनाओं से भविष्य में आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए बनाई जा रही रणनीति पर सवाल खड़े होते हैं। यह स्पष्ट है कि बाढ़ प्रबंधन का मूल ढांचा पर्याप्त नहीं है और सरकारी विभागों द्वारा समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी जाती जिससे समस्या और बढ़ जाती है।

चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया 
पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 28 जून को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था तब उसकी गंभीरता को नहीं समझा गया। एनडीएमए ने अगस्त की शुरुआत में इन अलर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कार्रवाई की लेकिन प्राधिकरण की ओर से दी गई सहायता कुछ हजार लोगों के लिए थी जबकि आपदसे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या लाखों में थी। इसके बाद सेना को सहायता के लिए बुलाना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंतोनियो गुतारेस ने अगस्त के अंत में 16 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने की अपील जारी की। कनाडा की संघीय सरकार ने भी मानवीय सहायता के लिए पचास लाख डॉलर जारी किये।

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए करने होंगे काम 
तात्कालिक तौर पर यह सहायता आवश्यक थी लेकिन पाकिस्तान की आगामी चुनौतियों के सामने यह बेहद कम है। भविष्य की आपदाओं से उबरने के लिए जिस तरह की तैयारी चाहिए, वह पाकिस्तान की विभिन्न एजेंसियों के बस की बात नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली बाढ़ जनित समस्याओं से निपटने के लिए व्यवस्थित ढंग से पाकिस्तान की क्षमता में वृद्धि किये जाने की जरूरत है। इस सहायता में वित्तीय संसाधन, तकनीकी मदद और मानव क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है। एनडीएमए और पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग ने समय रहते चेतावनी जारी करने वाली प्रणाली विकसित करने में सफलता पाई है लेकिन सामुदायिक स्तर पर और काम करने की जरूरत है।

 

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