ढाका: बांग्लादेश में शेख हसीना के प्रतिद्वंद्वी छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद कट्टरपंथियों ने भारत विरोधी गतिविधियों को लगातार बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके चलते भारत ने बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाही शहर चटगांव में स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र (IVAC) की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित कर दी हैं। यह कदम प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश में बढ़ते तनाव और हिंसा की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह निलंबन 21 दिसंबर से प्रभावी है।
कौन था हादी
उस्मान हादी पिछले साल छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन (जुलाई विद्रोह) के प्रमुख चेहरों में से एक था। हादी के आंदोलन से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। वह 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों के लिए उम्मीदवार भी था। इसी 12 दिसंबर को मध्य ढाका के विजयनगर इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान नकाबपोश बंदूकधारियों ने उन्हें सिर में गोली मार दी थी। सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के बाद बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक हिंसा, तोड़फोड़ और प्रदर्शन हुए। इसी क्रम में चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास पर बृहस्पतिवार को पथराव की घटना हुई, जिसके बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए IVAC ने सेवाएं निलंबित करने का फैसला लिया।
भारत ने वीजा केंद्र बंद करने के बाद दी प्रतिक्रिया
IVAC के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि "चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग पर हाल की घटना के कारण" सभी वीजा संबंधी सेवाएं बंद की जा रही हैं। बयान में आगे कहा गया कि सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद केंद्र को दोबारा खोलने की घोषणा की जाएगी। इस बीच, सिलहट में भारतीय सहायक उच्चायोग और वीजा आवेदन केंद्र पर शनिवार को सुरक्षा कड़ी कर दी गई। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (मीडिया) सैफुल इस्लाम ने कहा कि "कोई तीसरा पक्ष स्थिति का फायदा न उठा सके" इसलिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। IVAC ढाका, खुलना, राजशाही, चटगांव और सिलहट में केंद्र चलाता है।
बांग्लादेश में फैली अशांति
एक अधिकारी ने बताया कि चार अन्य केंद्र (ढाका, खुलना, राजशाही और सिलहट) सामान्य रूप से कार्यरत हैं। ढाका केंद्र को सुरक्षा कारणों से एक दिन बंद करने के बाद बृहस्पतिवार को फिर खोल दिया गया था। हालांकि, राजशाही और खुलना में भारत-विरोधी प्रदर्शनकारियों के मार्च की कोशिश के चलते उन्हें संक्षिप्त समय के लिए बंद करना पड़ा था। हादी को शनिवार को ढाका में राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के पास दफनाया गया। उनकी मौत ने बांग्लादेश की राजनीति को और उलझा दिया है, जहां अंतरिम सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी इन घटनाओं का असर पड़ रहा है।
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