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दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को बड़ा झटका, अदालत ने 'मार्शल लॉ' मामले में सुनाई उम्रकैद की सजा

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Feb 19, 2026 01:08 pm IST,  Updated : Feb 19, 2026 01:41 pm IST

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यून सुक येओल, दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति। - India TV Hindi
यून सुक येओल, दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति। Image Source : AP

सियोलः दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत ने बड़ा झटका दिया है। दक्षिण कोरिया की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति  येओल को 'मार्शल लॉ' लागू करने का दोषी माना है। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

क्या था पूरा मामला?

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को साल 2024 में मार्शल लॉ घोषित कर देश को संवैधानिक संकट में डालने और विद्रोह का नेतृत्व करने का दोषी पाया गया। 65 वर्षीय यून सुक येओल पर अप्रैल से ही विभिन्न आपराधिक आरोपों में मुकदमा चल रहा था, जो उनकी अल्पकालिक मार्शल लॉ घोषणा से जुड़े थे। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जजों ने गुरुवार को सबसे गंभीर आरोप "विद्रोह का सरगना होने" पर फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की थी। आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए मुख्य जज जी क्वी-येओन ने कहा कि यून ने "कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया और हिंसक तरीकों का सहारा लेकर राष्ट्रीय सभा को निष्क्रिय करने तथा लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करने की कोशिश की।

क्यों लगाया था मार्शल लॉ?

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल ने  3 दिसंबर 2024 की रात मार्शल लॉ घोषित किया था और कहा था कि यह जरूरी है, ताकि विपक्ष-प्रधान राष्ट्रीय सभा में मौजूद "राष्ट्र-विरोधी ताकतों" को खत्म किया जा सके। उन्होंने संसद को "अपराधियों का अड्डा" कहा और आरोप लगाया कि संसदीय बहुमत का इस्तेमाल कर उनकी सरकार को लकवाग्रस्त किया जा रहा है। उनके आदेश में सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई और समाचार मीडिया को सैन्य नियंत्रण में ला दिया गया। सशस्त्र सैनिकों ने राष्ट्रीय सभा और राष्ट्रीय चुनाव आयोग पर छापा मारा। अभियोजन पक्ष ने यून पर अपने राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार करने का आदेश देने का भी आरोप लगाया।

6 घंटे में वापस लेना पड़ा आदेश

जनता का गुस्सा लगभग तुरंत यून के मार्शल लॉ शासन को नाकाम कर दिया। जैसे ही टीवी पर यून की घोषणा दिखी, नागरिक राष्ट्रीय सभा की ओर दौड़े और सैनिकों का सामना किया जो राष्ट्रपति के आदेश पर संसद पर कब्जा करने आए थे। भीड़ ने सैनिकों को मुख्य कक्ष पर कब्जा करने से रोका, जबकि सांसदों ने आधी रात में इकट्ठा होकर उनके आदेश को निरस्त कर दिया। छह घंटे बाद यून को अपना आदेश वापस लेना पड़ा। लेकिन उनकी इस सत्ता हथियाने की कोशिश ने दशकों की सबसे बड़ी राजनीतिक संकट पैदा कर दिया।

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