दुबई: मिडिल ईस्ट में फिर एक बड़े जंग की आहट के बीच कुवैत ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाया है। कुवैत का कहना है कि ईरान ने रिवोल्यूशनरी गार्ड के हथियारबंद सदस्यों की एक टीम को देश के रणनीतिक बुबियान द्वीप पर हमला करने के लिए भेजा था। हालांकि ईरान ने कुवैत के इस आरोप को तुरंत स्वीकार नहीं किया। हाल में हुए युद्ध के दौरान ईरान की ओर से कुवैत पर कई बार हमले किए गए थे।
बुबियान द्वीप में घुसपैठ की कोशिश
कुवैत ने दावा किया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के छह हथियारबंद सदस्यों के एक दल ने इराक और ईरान के पास फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित बुबियान द्वीप में घुसपैठ करने की कोशिश की। यह आरोप तब लगाया गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग जाने ही वाले हैं।
फिर से युद्ध के फैलने की आशंका
इस आरोप और पूरे क्षेत्र में जारी हमलों ने इस बात का खतरा पैदा कर दिया है कि यह क्षेत्र फिर से खुले युद्ध की स्थिति में लौट सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी तेहरान के शिकंजे में है, और अमेरिका तथा ईरान के बीच बातचीत फिलहाल ठप पड़ी दिख रही है, जिससे संघर्ष के फिर से भड़कने का खतरा भी बढ़ गया है।
क्यों अहम है बुबियान द्वीप?
बता दें कि बुबियान द्वीप पर 'मुबारक अल कबीर बंदरगाह' स्थित है, जिसका निर्माण चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के हिस्से के रूप में किया जा रहा है। युद्ध के दौरान ईरान द्वारा इस परियोजना पर भी हमला किया गया था।
इजरायल ने संभाली यूएई की सुरक्षा की कमान
इस बीच इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने दावा किया कि इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए आयरन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली और सैन्य कर्मियों को तैनात किया है। इसे यूएई और इजरायल के बढ़ते रक्षा सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। उधर, बहरीन ने भी ईरान से कथित संबंध रखने वाले दो दर्जन से अधिक लोगों को जासूसी और साजिश के आरोप में सजा सुनाई है। इस इलाके में जारी घटनाक्रम ने खाड़ी देशों और ईरान के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है।
ट्रंप के चीन दौरे पर नजर
ट्रम्प इस सप्ताह शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन के लिए चीन जा रहे हैं, जिसके दौरान ईरान का मुद्दा भी चर्चा का विषय बनने की संभावना है। बीजिंग लंबे समय से ईरान के प्रतिबंधित कच्चे तेल का खरीदार रहा है, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से उसे भी नुकसान पहुंचा है जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है।